विरासत का हक मांग रहा पीपल का पेड़,विकास के दावे बदनाम
विरासत का पीपल उपेक्षा का शिकार, टूटी नालियां बनीं परसौनी की पहचान
महराजगंज। घुघली ब्लाक क्षेत्र के परसौनी गांव की तस्वीरें विकास के दावों की पोल खोल रही हैं।
गांव में काली स्थान पर वर्षों पुराना विशाल पीपल का वृक्ष, जो दिन-रात भरपूर ऑक्सीजन देकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहा है, आज भी “वृक्ष विरासत योजना” की सूची में शामिल होने का इंतजार कर रहा है।
न्याय मांग रहा ऑक्सीजन का पड़
सरकार जहां पर्यावरण बचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं ऐसा ऐतिहासिक और विशाल वृक्ष अधिकारियों की नजरों से ओझल बना हुआ है।
दूसरी ओर गांव की टूटी हुई नालियां और जर्जर पुलिया ग्रामीणों की परेशानी का कारण बनी हुई हैं।
बरसात के दिनों में हालात गंभीर
जानकारी के मुताबिक जगह-जगह टूटे सीमेंट के टुकड़े और बदहाल जल निकासी व्यवस्था विकास कार्यों की हकीकत बयां कर रहे हैं। बरसात के दिनों में यहां हालात और भी गंभीर हो सकते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
एक तरफ पर्यावरण संरक्षण के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, तो दूसरी तरफ सैकड़ों वर्ष पुराने पीपल के वृक्ष को विरासत का दर्जा दिलाने की कोई पहल नहीं हो रही।
सवाल यह है कि आखिर कब जागेंगे जिम्मेदार
क्या परसौनी का यह पीपल वृक्ष “विरासत वृक्ष” का सम्मान पाएगा या यूं ही उपेक्षा का शिकार बना रहेगा, और क्या टूटी नालियों व पुलिया की मरम्मत कर ग्रामीणों को राहत मिलेगी
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