28 दिन का ‘मासिक रिचार्ज’ बना बड़ा घोटाला केंद्र सरकार से कार्रवाई की मांग
अधिवक्ता ने उठाया मुद्दा—12 की जगह 13 बार भुगतान कराने का आरोप, उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन बताया

नई दिल्ली/महराजगंज। देशभर में मोबाइल यूजर्स से जुड़े एक बड़े मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया है।
मासिक रिचार्ज’ नीति पर गंभीर सवाल
जिला महाराजगंज उत्तर प्रदेश के अधिवक्ता विनय कुमार पांडेय एवं Border Lawyers Trust के सह-संस्थापक विनय कुमार पाण्डेय ने केंद्रीय संचार मंत्री को पत्र भेजकर टेलीकॉम कंपनियों की ‘मासिक रिचार्ज’ नीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
पत्र में कहा गया है कि कंपनियाँ ‘एक माह’ के नाम पर सिर्फ 28 दिन की वैधता दे रही हैं। इससे उपभोक्ताओं को साल में 12 की बजाय 13 बार रिचार्ज करना पड़ता है। इसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ बताया गया है।
जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ
अधिवक्ता विनय कुमार पांडेय का तर्क है कि ‘मास’ का अर्थ कैलेंडर माह (30/31 दिन) होता है, जबकि कंपनियाँ जानबूझकर 28 दिन का चक्र बनाकर आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही हैं। इसे एक तरह का ‘अप्रत्यक्ष कर’ भी बताया गया है।
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि TRAI के दिशा-निर्देशों के बावजूद कंपनियाँ भ्रामक टैरिफ प्लान पेश कर रही हैं। इससे पारदर्शिता और उपभोक्ता के सूचना के अधिकार का उल्लंघन हो रहा है।
उच्च स्तरीय समिति गठित करने की भी मांग
मामले को गंभीर बताते हुए केंद्र सरकार से मांग की गई है कि सभी टेलीकॉम कंपनियों को 30/31 दिन की वैधता वाले प्लान को ‘प्राथमिक मासिक प्लान’ के रूप में लागू करने का निर्देश दिया जाए। साथ ही, इस पूरी नीति की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित करने की भी मांग की गई है।
खबर की माने तो यह मुद्दा सामने आने के बाद अब लाखों मोबाइल उपभोक्ताओं की नजर केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है।
PM News 18 Hindi News Website
