सूखी नहरें प्यासे खेत,जेब खाली… संकट में किसान की खुशहाली
महंगे डीजल ने रोकी खेती की रफ्तार, अन्नदाता परेशान
संकट में अन्नदाता — खेती रुकी तो भूख से कैसे बचेगा देश
देश का अन्नदाता आज भारी संकट के दौर से गुजर रहा है। खेतों की जुताई कराने के बाद अब किसान धान की बेहन गिराने की तैयारी में जुटा था, लेकिन डीजल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों ने किसानों की कमर तोड़ दी है।
किसान खुद को मझधार में फंसा
मई माह में बेहन का कार्य समाप्त होने के बाद रोपाई का कार्यक्रम शुरू होना है, मगर मौजूदा हालात में किसान खुद को मझधार में फंसा महसूस कर रहा है।
किसानों का कहना है कि अगर समय पर खेती नहीं हुई तो आने वाले दिनों में खाद्यान्न संकट खड़ा हो सकता है।
आर्थिक बोझ तले दबता जा रहा किसान
सरकार चाहे जितने दावे करे, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है और किसान आर्थिक बोझ तले दबता जा रहा है।
किसानों की स्थिति और गंभीर तब होने लग गई जब नहरों ने भी किसानों को दगा दे दिया।
दगा दे गई नहरें,किसान परेशान
खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। यदि नहरों में समय से पानी आ जाता तो किसान बेहन का कार्य पूरा कर लेते और फसलों की तैयारी सुचारु रूप से हो जाती। लेकिन पानी के अभाव में किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है।
गांव-गांव में किसान यही सवाल पूछ रहा है कि आखिर इस संकट की घड़ी में वह करे तो क्या करे? डीजल महंगा, सिंचाई ठप और खेती पर संकट… ऐसे में अन्नदाता की पीड़ा सुनने वाला आखिर कौन है
अन्नदाता बचाओ, देश बचाओ,खेती रुकी तो भूख बढ़ेगी
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