ई-रिक्शा चालकों पर साइबर सिंडिकेट का हमला अधिवक्ता ने DGP को भेजा शिकायत पत्र
नमस्कार, उत्तर प्रदेश में ई-रिक्शा चालकों के साथ कथित डिजिटल हैकिंग और अवैध वसूली का बड़ा मामला सामने आया है।
अधिवक्ता विनय कुमार पांडेय ने डीजीपी और साइबर सेल को पत्र भेजकर ‘ऑपरेशन ई-कवच’ शुरू करने की मांग की है।
आरोप है कि BMS ऐप के जरिए ई-रिक्शा को रिमोट से बंद कर चालकों से उगाही की जा रही है। आखिर क्या है पूरा मामला और क्या होगी पुलिस की कार्रवाई , देखिए हमारी यह विशेष रिपोर्ट।
महराजगंज/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ई-रिक्शा चालकों को निशाना बनाकर कथित रूप से किए जा रहे डिजिटल हैकिंग और अवैध वसूली के मामलों को लेकर एक बड़ी कानूनी पहल सामने आई है।
बॉर्डर लॉयर्स ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता अधिवक्ता विनय कुमार पांडेय ने पुलिस महानिदेशक (DGP) उत्तर प्रदेश तथा महानिदेशक (साइबर अपराध) को विस्तृत शिकायत एवं सुझाव पत्र भेजकर पूरे प्रदेश में ‘ऑपरेशन ई-कवच’ शुरू करने की मांग की है।
क्या है आप
अधिवक्ता विनय कुमार पांडेय का आरोप है कि प्रदेश के कई जिलों में कुछ आपराधिक तत्व बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) ऐप और मोबाइल एप्लिकेशन का दुरुपयोग कर ई-रिक्शा चालकों के वाहनों को दूर बैठे ही ब्लॉक या बंद कर देते हैं।
चालकों की बिना अनुमति तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है और वाहन दोबारा चालू करने के नाम पर उनसे अवैध वसूली की जाती है।
उन्होंने कहा कि यदि ऐसा किया जाता है, तो बिना मालिक की अनुमति किसी वाहन के डिजिटल सिस्टम में घुसपैठ करना और उसे नियंत्रित करना सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) के विभिन्न प्रावधानों के तहत गंभीर और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आ सकता है।
क्या है प्रमुख मांगें
पूरे प्रदेश में ‘ऑपरेशन ई-कवच’ चलाकर साइबर अपराधियों के खिलाफ विशेष अभियान।
ई-रिक्शा बैटरी निर्माता कंपनियों और सॉफ्टवेयर डीलरों के लिए सख्त सुरक्षा गाइडलाइन।
प्रत्येक जिले के साइबर सेल में ई-रिक्शा चालकों के लिए नोडल अधिकारी की नियुक्ति,ई-रिक्शा स्टैंडों पर साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान तथा हेल्पलाइन 1930 का व्यापक प्रचार-प्रसार।
चालकों की आजीविका सुरक्षित
अधिवक्ता विनय कुमार पांडेय ने डीजीपी से मांग की है कि इस कथित संगठित साइबर सिंडिकेट के खिलाफ तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जाए, ताकि प्रदेश के लाखों ई-रिक्शा चालकों की आजीविका सुरक्षित रह सके और डिजिटल माध्यम से होने वाले शोषण पर रोक लगाई जा सके।
हालांकि, इस संबंध में पुलिस या संबंधित विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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