Heritage: किसानों और मजदूरों की रोजी-रोटी का आधार रहा घुघली चीनी मिल,अब बन गया इतिहास
महराजगंज। जनपद की ऐतिहासिक धरोहर Heritage और घुघली की पहचान रही घुघली चीनी मिल की 103 वर्ष पुरानी चिमनी हल्के झोंकों में धराशायी हो गई।
जैसे ही चिमनी गिरी, पूरे इलाके में सन्नाटा पसर गया। यह सिर्फ एक ढांचा नहीं था, बल्कि पीढ़ियों की यादें, मेहनत और समृद्धि की कहानी थी।
पुनरुद्धार की चर्चाएं
ब्रिटिश शासनकाल में वर्ष 1920 में स्थापित यह मिल कभी हजारों किसानों और मजदूरों की रोजी-रोटी का आधार थी।
गन्ना किसानों की गाड़ियों की कतारें, मिल की सायरन की आवाज और बाजारों की रौनक इस क्षेत्र की पहचान हुआ करती थी।
लेकिन 1999 में मिल बंद हो गई और तब से यह परिसर उपेक्षा का शिकार रहा। पुनरुद्धार की चर्चाएं हुईं, फाइलें चलीं, मामला माननीय न्यायालय में लंबित बताया जाता रहा, पर जमीनी स्तर पर कुछ नहीं बदला।
पहचान रही चिमनी भी इतिहास बन गई
धीरे-धीरे मिल खंडहर बनती गई और अब उसकी पहचान रही चिमनी भी इतिहास बन गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के कारण यह धरोहर खत्म हो गई।
लोगों ने मांग की है कि मिल परिसर को संरक्षित कर स्मारक के रूप में विकसित किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने गौरवशाली अतीत को जान सकें।
घुघली की गिरी चिमनी आज एक सवाल खड़ा कर रही है—क्या हमारी विरासत यूं ही मलबे में बदलती रहेगी?
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