झोपड़ी में छिपा ‘मिठास का खजाना
शिकारपुर चौराहे की बर्फी के दीवाने बने हजारों राहगीर
रोज 200 लीटर शुद्ध दूध से तैयार होती है खास बर्फी, शाम 4 बजे के बाद खत्म हो जाता है पूरा स्टॉक
महराजगंज। कहते हैं कि स्वाद की पहचान महंगी दुकान नहीं, बल्कि गुणवत्ता और भरोसा होता है। इसका जीता-जागता उदाहरण महराजगंज-गोरखपुर मार्ग पर स्थित शिकारपुर चौराहा है, जहां एक साधारण सी झोपड़ी में बनने वाली बर्फी आज दूर-दूर तक अपनी मिठास के लिए मशहूर हो चुकी है।
हर दिन महराजगंज से गोरखपुर और गोरखपुर से महराजगंज आने-जाने वाले सैकड़ों राहगीर इस दुकान पर रुककर बर्फी का स्वाद लेते हैं। इतना ही नहीं, बड़ी संख्या में लोग यहां से बर्फी खरीदकर अपने घर भी ले जाते हैं।
विशेष तरीके से बर्फी की तैयारी
दुकानदार के अनुसार, प्रतिदिन करीब 200 लीटर शुद्ध दूध से कम चीनी की मात्रा में विशेष तरीके से बर्फी तैयार की जाती है। यही वजह है कि इसका स्वाद लोगों को बार-बार यहां खींच लाता है।
बर्फी की बिक्री दो शिफ्ट में होती है, लेकिन मांग इतनी अधिक रहती है कि शाम 4 बजे के बाद आने वाले कई ग्राहकों को खाली हाथ लौटना पड़ता है, क्योंकि तब तक पूरा स्टॉक समाप्त हो जाता है।
इलाके में एक खास पहचान
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से यह दुकान अपने स्वाद और शुद्धता की वजह से लोगों का भरोसा जीतती आ रही है। बिना किसी बड़े विज्ञापन के यह झोपड़ी आज पूरे इलाके में एक खास पहचान बना चुकी है।
अगर आप भी महराजगंज-गोरखपुर मार्ग से गुजर रहे हैं, तो शिकारपुर चौराहे की इस मशहूर बर्फी का स्वाद लेना शायद आपके सफर की सबसे मीठी याद बन सकता है।
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