सावन के पवित्र माह में सोमवार के दिन जलाभिषेक का विशेष महत्व
बनारसी बाबा
हिंदू धर्म में श्रावण (सावन) मास भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है।
मान्यता है कि इस पूरे माह में भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने और विशेष रूप से प्रत्येक सोमवार को शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से मनुष्य की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।
सावन मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार सावन मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। समुद्र मंथन के समय निकले हलाहल विष का पान करने के बाद देवताओं ने भगवान शिव को शीतलता प्रदान करने के लिए जल अर्पित किया था। तभी से शिवलिंग पर जलाभिषेक की परंपरा चली आ रही है।
माना जाता है कि सावन के सोमवार को जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग, अक्षत और पुष्प अर्पित करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
सावन के प्रत्येक सोमवार को देशभर के शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। कांवड़िए पवित्र नदियों से जल लाकर शिवलिंग का अभिषेक करते हैं।
आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम
ॐ नमः शिवाय और हर-हर महादेव के जयघोष से मंदिरों का वातावरण भक्तिमय हो जाता है। यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम भी है।
उत्तर प्रदेश के जनपद महाराजगंज सहित सिसवा क्षेत्र के पंचमुखी शिव मंदिर इटहियां, घिउहां के बहुरहा बाबा स्थान तथा अन्य शिवालयों में भी सावन के प्रत्येक सोमवार को हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश
सुबह से देर शाम तक पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और रुद्राभिषेक का आयोजन होता है, जिससे पूरा वातावरण शिवमय हो जाता है।
सावन का सोमवार हमें श्रद्धा, संयम, सेवा, सदाचार और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश देता है। भगवान शिव की उपासना केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि मानव जीवन को सत्य, करुणा और सरलता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देती है।
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