‘पंडित’ शब्द पर सियासी संग्राम, सनातन ब्राह्मण महा संस्था ने सरकार पर साधा निशाना
संस्थापक अध्यक्ष पंडित नर्वदेश्वर शुक्ल ने कहा मामले की गहराई से हो जांच
महराजगंज। उत्तर प्रदेश पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा 2026 के हिंदी प्रश्नपत्र में ‘पंडित’ शब्द को लेकर उठे विवाद humiliated ने अब सामाजिक और धार्मिक संगठनों का ध्यान भी अपनी ओर खींच लिया है।
ब्राह्मण समाज की भावनाओं पर ठेस
सनातन ब्राह्मण महा संस्था ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष Pandit Narveshwar Shukla ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
पंडित नर्वदेश्वर शुक्ल ने कहा कि परीक्षा में पूछे गए सवाल में ‘पंडित’ शब्द को जिस संदर्भ में रखा गया, वह न केवल अनुचित है बल्कि ब्राह्मण समाज की भावनाओं को आहत humiliated करने वाला भी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में यूजीसी से जुड़े कुछ मुद्दों पर उठे सवालों और विरोध को दबाने के लिए इस तरह के विषयों को हवा दी जा रही है।
यह शब्द साजिश प्रतीत होती है
उन्होंने कहा कि यह पूरा प्रकरण सरकार द्वारा किया गया एक तरह का “डैमेज कंट्रोल” प्रतीत होता है, जिससे अन्य मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके।
शुक्ल के अनुसार ‘पंडित’ शब्द भारतीय संस्कृति में ज्ञान, विद्वता और सम्मान का प्रतीक रहा है। ऐसे शब्द को नकारात्मक अर्थों के साथ जोड़ना किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। humiliated
सनातन ब्राह्मण महा संस्था ट्रस्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार से मांग की है कि पूरे प्रकरण की गहराई से जांच कराई जाए।
भूमिका तैयार करने वाले की जांच होगी
संस्था का कहना है कि प्रश्नपत्र तैयार करने वाले पैनल, संबंधित अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर दोषियों के खिलाफ वैधानिक और दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
पंडित नर्वदेश्वर शुक्ल ने स्पष्ट किया कि उनकी संस्था समाज के सम्मान और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि यदि इस मामले में निष्पक्ष जांच और कार्रवाई नहीं होती है तो सनातन ब्राह्मण महा संस्था आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध जारी
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