Dimissme : बर्खास्त दस शिक्षकों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
Dimissme : कोई केरल, राजस्थान तो कोई मध्य प्रदेश के डीएड की फर्जी डिग्री लगाकर नौकरी में थे
शिक्षकों की नियुक्ति के समय प्रमाण पत्रों की जांच के बाद हुई थी तो क्या पटल कर्मियों के मिलीभगत से हुई
थी नियुक्ति Dimissme : शिक्षकों का हैरतअंगेज कारनामा, नौकरी के लिये केरल, राजस्थान व मध्य प्रदेश से बनवा लिया फर्जी प्रमाण पत्र
शिक्षकों के फर्जी प्रमाण से उठा पर्दा
बेसिक शिक्षा विभाग ने काफी जद्दोजहद के बाद बर्खास्त दस शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
मुकदमा दर्ज होने के बाद शिक्षकों के फर्जी प्रमाण पत्रों का परत दर परत खुला तो लोग दांतों तले उंगली दबा ली।
निचलौल ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय बढ़ैपुरवा में तैनात रहे
Dimissme : शिक्षक अरविन्द कुमार यादव की नियुक्ति २०१६ में हुई थी।
यह इण्टर का मार्कसीट केरल का लगाया था। जबकि स्नातक का मार्कसीट गलत है
भगवंत विश्वविद्यालय सिकर रोड अजमेर राजस्थान का लगाया था।
लेकिन जांच में पंजीकरण ही नहीं पाया गया। अब सवाल यह उठ रहा है
अधिकारियों के आंखों पर क्या पट्टी बंधी
Dimissme : नियुक्ति के समय अधिकारियों के आंखों पर क्या पट्टी बंधी थी।
निचलौल के प्राथमिक विद्यालय बैठवलिया में तैनात रहे शिक्षक सैयद अली
स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय मध्यप्रदेश के डीएड की डिग्री लगाया था।जो जांच में फर्जी मिली।
इसने अपना पता तिवारीपुर गोरखपुर बताया था जबकि यह श्यामदेउरवा थाना क्षेत्र में क्लीनिक है।
निचलौल ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय पैकौली में तैनात रहे देवानन्द यादव का
विशिष्ट बीटीसी का प्रमाण पत्र फर्जी मिला। जबकि प्राथमिक विद्यालय शिकारपुर में तैनात रहे
अजय प्रताप चौधरी बस्ती के कम्पोजिट विद्यालय चकिया क्षेत्र कुदरहा के
फर्जी ढंग से नियुक्ति
प्रधानाध्यापक के प्रमाण पत्र पर फर्जी ढंग से नियुक्ति करा लिया था।
अब सवाल यह उठ रहा है कि नियुक्ति के समय इन शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच के बाद ही
नियुक्ति दी गयी थी। तो क्यां तत्कालीन अधिकारियों एवं कर्मचारियों के मिलीभगत से तो नियुक्ति नहीं हुई थी।
अगर पटल के कर्मियों की जांच भी की जाय तो उनका भी गला फंस सकता है।
क्योंकि नियुक्ति के समय सारे प्रमाण पत्रों के जांच के बाद ही नियुक्ति दी गयी थी।
कहीं पटल अधिकारियों, कर्मचारियों के मिलीभगत से तो इन शिक्षकों ने अपनी नियुक्ति करायी थी।
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