Punganur cow: पुंगनूर गाय की अद्भुत कहानी,देख कर उठेगा चेहरा
Punganur cow: भारतीय नस्ल की पुंगनूर गाय प्राचीन से ही चली आ रही है ऐसा बताया जाता है कि
ऋषि महर्षि भी इन को पालते थे। इन की देखभाल भी आसानी से हो जाती है।
अगर इनके खाने की तरफ सोचा जाए तो इनका कम चारा में काम चल जाता है।
इनकी दूध सेहत के लिए अच्छा होता है देश में विदेशी नस्लो का चलन बढने लगा
यह गाय विलुप्त के कगार पर पहुंच गई जानकारों की मानें तो अकेली छोटी नस्ल की गाय यही नहीं है
बल्कि केरल वेचूर गाय को भी मिनी मिनीएचर यानी छोटी गाय की लिस्ट में शामिल किया गया है
जिसकी लंबाई तीन से चार फीट तक होती है लेकिन पुंगनूर की लम्बाई कम है।
Punganur cow: आंध्र प्रदेश में एक से 2 फीट लंबाई वाली पुंगनूर गाय भी मौजूद हैं ।
बीते समय से यह विलुप्त की कगार पर खड़ी हो चुकी थी लेकिन आज इसका बाजार में काफी डिमांड है
4 एकड़ में फैला गौशाला
जान कारों की माने तो आंध्र प्रदेश में पूर्वी गोदावरी जिले के लिगम पट्टी गांव में
लगभग 4 एकड़ में फैली एक गौशाला में पुंगनूर गाय का संरक्षण किया जाता है।
इस गौशाला में लगभग 300 की संख्या में Punganur cow: की नस्ल हैं ।
इस गौशाला के मालिक कृष्णम राजू ने लगभग 15 साल के पहले पुंगनूर गायक खरीदी थी
डा राजू की माने तो एक सरकारी फार्म पर इसका कृत्रिम गर्भाधान की भी करवाया
जिसके बाद इस की संख्या में भी इजाफा होने लगा आज इस गाय का मांग बढ़ गई।
जितनी छोटी उतना बड़ा दाम
डॉक्टर राजू की माने तो पुंगनूर जितनी छोटी होती है इसकी कीमत उतना ही ज्यादा होती है।
वहीं इसका दूध स्वास्थ के लिए काफी लाभदायक है जानकारों की माने तो
इसके दूध में 8% वसा के साथ औषधीय गुणों से भरपूर होता है।
तो वही अन्य गायों में 3 से 3.5 % तक मिलता है इनका लगभग 5 किलो चारा में पेट भर जाता है
अब इसके चलते दक्षिण भारत के साथ-साथ दिल्ली up बिहार गुजरात राजस्थान और
सिसवा क्षेत्र के भुजौली गांव में पुंगनूर गाय
मध्य प्रदेश के तमाम इलाकों में मिल रहे हैं ऐसे में जनपद महाराजगंज के सिसवा क्षेत्र के भुजौली गांव में
प्रमुख प्रतिनिधि धीरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ धीरु भइया ने अपने घर जिले में पहली बार लाकर काफी खुश हैं
उन्होंने बताया कि यह गाए पूरे घर में आसानी से घूम लेती हैं कम चारा में काम चल जाता है
तो वही बैडरूम अपना आशियाना बना लेती हैं जिससे आसानी से इनको रखा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि शास्त्रों के मुताबिक गोमाता पूजा के लिए भी अच्छी मानी जाती है।
घर को त्यौहार की तरह देखा जा रहा है
उन्होंने ने फोटो के जरिए बताया कि हम जब हम पूजा के लिए बैठते हैं।
यह गोमाता हमसे पहले पूजा स्थल पर पहुंचकर विचरण करती हैं और पूजा समापन तक रहती है
फिर इधर उधर घूमने लगती हैं इससे आज हमारा घर त्यौहार के रूप में देखा जा रहा है।
तो वही यह Punganur cow: रोज तमाम लोग इनको देखने आते हैं और इनके साथ खेलते भी है
वही गोपालक भी प्रतिदिन इनके साथ घंटो सुबह के समय खेलने निकल जाते हैं ।
जिससे आज जिले में सोशल मीडिया पर वीडियो खुब वायरल हो रहा है
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