Saturday , 30 May 2026

पीपल के चबूतरे पर 3.37 लाख खर्च,अगयां ग्राम सभा में ‘वृक्ष विरासत’ पर उठे सवाल

पीपल के चबूतरे पर 3.37 लाख खर्च,अगयां ग्राम सभा में ‘वृक्ष विरासत’ पर उठे सवाल

  चबूतरा और इंटरलॉकिंग या फिर खर्च                     का बड़ा खेल  

     

  दस्तावेजों ने खोली पोल

महराजगंज। जनपद महराजगंज के सदर विकासखंड अंतर्गत ग्राम सभा अगयां में सरकार की महत्वाकांक्षी “वृक्ष विरासत” योजना उस समय चर्चा का विषय बन गई जब गांव स्थित मां काली स्थान पर पीपल के पेड़ के चबूतरे और इंटरलॉकिंग निर्माण कार्य में 3 लाख 37 हजार 511 रुपये खर्च किए जाने का मामला सामने आया। गांव में इस कार्य को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि एक साधारण चबूतरे और सीमित इंटरलॉकिंग कार्य पर इतनी बड़ी धनराशि खर्च होना कई सवाल खड़े करता है।

वृक्ष विरासत’ योजना बनी चर्चा का केंद्र

मामला तब और गंभीर हो गया जब दो अलग-अलग रसीद एवं दस्तावेज सामने आए, जिनसे निर्माण कार्य और खर्च की वास्तविकता पर संदेह गहरा गया है।

सूत्रों के अनुसार, मां काली स्थान पर स्थित पीपल के पेड़ को “वृक्ष विरासत” योजना के तहत संरक्षित और विकसित करने के नाम पर यह धनराशि खर्च दिखाई गई है। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि मौके पर हुए कार्य और खर्च के आंकड़ों में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।

गांव में चर्चा है कि यदि संबंधित विभाग और पंचायत प्रशासन द्वारा खर्च का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।

ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने और सरकारी धन के उपयोग की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।

लाखों खर्च के बाद भी काम अधूरा 

अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर पीपल के पेड़ के चबूतरे और इंटरलॉकिंग पर लाखों रुपये खर्च करने की जरूरत क्यों पड़ी,क्या सरकारी धन का सही उपयोग हुआ या फिर योजना की आड़ में कोई खेल खेला गया? यह जांच का विषय बन चुका है।

फिलहाल गांव में एक ही चर्चा है— “पीपल के पेड़ पर आखिर 3.37 लाख रुपये कैसे खर्च हो गए, जबकि तमाम काम बाकी है।

 

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