सैनिटरी पैड्स में ज़हरीले रसायनों का आरोप, राष्ट्रीय महिला आयोग से हस्तक्षेप की मांग
बॉर्डर लॉयर्स ट्रस्ट के CEO एवं अधिवक्ता विनय कुमार पांडेय ने भेजा कानूनी प्रार्थना पत्र
महिलाओं के स्वास्थ्य अधिकारों की सुरक्षा के लिए उठाई आवाज
महराजगंज। देशभर की महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य से जुड़े एक गंभीर मुद्दे को लेकर बॉर्डर लॉयर्स ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) एवं अधिवक्ता विनय कुमार पांडेय ने राष्ट्रीय महिला आयोग को विस्तृत प्रार्थना पत्र भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
उन्होंने आरोप लगाया है कि बाजार में बिक रहे कई व्यावसायिक सैनिटरी पैड्स में फ्यूरान, डाइऑक्सिन तथा अन्य हानिकारक रसायनों के अंश पाए जाते हैं, जो महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।
महिलाओं के संवेदनशील अंगों की सुरक्षा
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा एवं सचिव को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों और लैब रिपोर्टों के अनुसार सैनिटरी पैड निर्माण में प्रयुक्त ब्लीचिंग प्रक्रिया के कारण कुछ हानिकारक रासायनिक तत्व उत्पादों में मौजूद रह सकते हैं।
उन्होंने कहा कि ये रसायन महिलाओं के शरीर के अत्यंत संवेदनशील अंगों के सीधे संपर्क में आते हैं, जिससे लंबे समय में स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं उत्पन्न होने की आशंका रहती है।
गंभीर बीमारियों का खतरा
अधिवक्ता विनय कुमार पांडेय ने अपने पत्र में दावा किया है कि ऐसे रसायनों के निरंतर संपर्क से त्वचा संक्रमण, यूटीआई, हार्मोन असंतुलन, प्रजनन क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव तथा कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
उन्होंने इसे महिलाओं के स्वास्थ्य और गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए भारतीय संविधान के अनुच्छेद-21 का हवाला दिया है।
पत्र में राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम-1990 की धारा-10 तथा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-2019 का उल्लेख करते हुए आयोग से स्वतः संज्ञान लेने की मांग की गई है। साथ ही यह भी कहा गया है कि उपभोक्ताओं को उत्पाद में प्रयुक्त रसायनों की पूरी जानकारी मिलनी चाहिए और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े मानक लागू किए जाने चाहिए।
बॉर्डर लॉयर्स ट्रस्ट की ओर से आयोग से चार प्रमुख मांगें की गई हैं। इनमें सैनिटरी पैड निर्माण में 100 प्रतिशत क्लोरीन-मुक्त ब्लीचिंग प्रक्रिया को अनिवार्य करना, पैकेट पर सभी रसायनों का हिंदी एवं अंग्रेजी में स्पष्ट उल्लेख करना, मानकों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई तथा जैविक एवं बायोडिग्रेडेबल सूती पैड्स को बढ़ावा देना शामिल है।
विनय कुमार पांडेय ने कहा कि देश की आधी आबादी के स्वास्थ्य और जीवन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय महिला आयोग से जनहित में इस मामले पर तत्काल संज्ञान लेकर आवश्यक कानूनी और नीतिगत कदम उठाने की अपील की है।
महिलाओं के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं होना चाहिए
यदि सैनिटरी उत्पादों में हानिकारक तत्व मौजूद हैं तो उनकी जांच, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार और नियामक संस्थाओं की जिम्मेदारी है।” – विनय कुमार पांडेय, अधिवक्ता एवं CEO, बॉर्डर लॉयर्स ट्रस्ट।
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