27 साल बाद बजेगी घुघली चीनी मिल की सीटी
शुगर प्लांट के साथ लगेगा इथेनॉल प्लांट, 900 दिनों में हजारों किसानों और युवाओं की बदलेगी तकदीर
बंद चिमनियों से फिर उठेगा धुआं, घुघली को मिलने जा रही नई पहचान
गन्ना किसानों के अच्छे दिन! घुघली में लगेगा हाईटेक शुगर व इथेनॉल प्लांट
घुघली में विकास का बिगुल, हजारों परिवारों को मिलेगा रोजगार और सम्मान
महराजगंज। घुघली क्षेत्र के किसानों और युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। वर्षों से बंद पड़ी घुघली चीनी मिल को फिर से चालू करने की कवायद तेज हो गई है।
मिली जानकारी के मुताबिक मिल परिसर में अत्याधुनिक शुगर प्लांट के साथ इथेनॉल प्लांट स्थापित किए जाने की तैयारी शुरू हो चुकी है।
प्रशासन और मिल प्रबंधन ने लगभग 900 दिनों के भीतर परियोजना को क्रियाशील करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
शुरू हो गया सफाई का कार्य
जानकारी के अनुसार मिल परिसर में सफाई, जमीन समतलीकरण और पुरानी जर्जर मशीनों को हटाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
नई तकनीक से लैस प्लांट स्थापित होने के बाद घुघली सहित आसपास के 50 से अधिक गांवों के गन्ना किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। वर्तमान में किसानों को अपना गन्ना बेचने के लिए 40 से 50 किलोमीटर दूर स्थित चीनी मिलों का रुख करना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है।
बताया जा रहा है कि नई परियोजना में चीनी उत्पादन के साथ-साथ इथेनॉल का भी निर्माण किया जाएगा। इससे मिल की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और किसानों को समय पर भुगतान मिलने की उम्मीद बढ़ेगी।
सैकड़ों मजदूरों को मिलेगा रोजगार
अगर ऐसा होता है तो निर्माण कार्य के दौरान सैकड़ों मजदूरों को रोजगार मिलेगा, जबकि प्लांट शुरू होने के बाद लगभग 800 से 1000 लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने का अनुमान है।
परियोजना को मिली हरी झंडी-डायरेक्टर बृजेश
मिल के डायरेक्टर बृजेश चौधरी ने बताया कि शासन से परियोजना को हरी झंडी मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि नई तकनीक के जरिए चीनी और इथेनॉल दोनों का उत्पादन होगा, जिससे मिल घाटे से उबर सकेगी और पूरे क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।
उन्होंने बताया कि मिल परिसर में सफाई और अन्य तैयारियों का कार्य तेजी से चल रहा है।
खिलेगा किसानों का चेहरा
स्थानीय किसानों, व्यापारियों और युवाओं ने इस पहल का स्वागत किया है। लोगों का मानना है कि वर्षों से बंद पड़ी घुघली चीनी मिल के पुनः संचालन से क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और गन्ना किसानों के चेहरे पर फिर से मुस्कान लौटेगी।
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