By-Election: सीसामऊ उपचुनाव में भाजपा व सपा के बीच काटे की लड़ाई
By-Election: यूपी के सीसामऊ उपचुनाव में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच काफी टक्कर देखने को मिली है।
माने तो मतदाताओं का रुझान भी यही बता रहा है। बसपा इस चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला नहीं बना पाई है ।
By-Election: सीसा मऊ के मुस्लिम क्षेत्रों में सपा को बढ़त मिली है लेकिन भाजपा भी पीछे नहीं है।
हिंदू क्षेत्रों में भाजपा ने मजबूत पकड़ बनाई है। 23 नवंबर को होने वाली मतगणना के नतीजे चौंकाने वाले हो सकते हैं।
ऐसे में सीसामऊ सीट के लिए By-Election: में मतदान के बाद उभरी तस्वीर में भाजपा व सपा के बीच करीबी टक्कर हुई।
मुस्लिम क्षेत्रों में सपा की साइकिल दौड़ी
सही माने तो मतदाताओं का रुख भी यही कह रहा है। बसपा त्रिकोण नहीं बना सकी।
वहां पर मुस्लिम क्षेत्रों में सपा की साइकिल दौड़ी, लेकिन भाजपा के भी बस्ते लगने से भगवा झंडे लहराते दिखे।
यही कारण है कि मतगणना के दौरान आने वाले परिणाम और चमत्कार करने वाले हो सकते हैं।
By-Election: वही हिंदू क्षेत्र में भाजपा ने तगड़ी पकड़ बनाई। यहां भी सपा के बस्तों में लोग नजर आए।
By-Election: में भाजपा ने सुरेश अवस्थी, सपा ने नसीम सोलंकी व बसपा ने वीरेंद्र कुमार को मैदान में उतारा था।
भाजपा ने घर-घर दस्तक दिया
प्रचार से लेकर मतदान तक भाजपा, उसका संगठन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर तमाम मंत्री,
सांसद, विधायक आक्रमक रुख अपनाए रहे। घर-घर दस्तक देकर बूथों, पन्ना प्रमुखों की रणनीति पर काम हुआ।
सपा ने भी मुस्लिम क्षेत्रों के साथ ही हिंदू इलाकों में भी प्रचार में कसर नहीं छोड़ी।
डटे रहे सपाई
सपा प्रमुख अखिलेश यादव, सियासी रणनीतिकार शिवपाल सिंह यादव, सांसद डिंपल यादव के साथ ही दूसरे नेता डटे रहे।
बताया जाता है कि बसपा प्रचार से ही पिछड़ गई। उसकी कोई बड़ी रैली तक नहीं हुई।
सही माने तो दलित बस्तियों में प्रचार किया पर मतदान के दिन खास उपस्थिति नहीं दिखी।
भाजपा-सपा के प्रत्याशी लड़े और उनके शीर्षस्थ नेता कमान संभाले रहे।
भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल, संदीप ठाकुर, अनूप तिवारी, नव तिवारी बूथ-बूथ घूमते रहे।
वोट डाला और फिर घर चले गए
प्रदेश उपाध्यक्ष एवं एमएलसी मानवेंद्र सिंह, पूर्व विधायक अजय कपूर, विधायक अभिजीत सिंह सांगा भी डटे रहे।
इसी तरह सपा में सुनील साजन रात दिन एक किए रहे। प्रदेश सचिव आशीष चौबे टीम के साथ बूथों पर मुस्तैद नजर आए।
मतदान के बाद अब 23 नवंबर को मतगणना पर सबकी निगाह टिक गई है।
चर्चा है कि भाजपा 28 साल बाद इस सीट पर अपना कमल खिला पाएगी या सपा की साख बचेगी।
बुधवार सुबह कोहरे और सर्द हवाओं के बीच मतदाता खामोशी की चादर ओढ़कर घर से निकले।
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