इथेनॉल युक्त पेट्रोल से बढ़ेंगी पर्यावरणीय, स्वास्थ्य और आर्थिक चुनौतियां : अमरेन्द्र शर्मा
महराजगंज। पेट्रोल में इथेनॉल (एथिल अल्कोहॉल) के अनिवार्य मिश्रण को लेकर विश्व विज्ञान संगठन के सदस्य अमरेन्द्र शर्मा ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इसके व्यापक पर्यावरणीय, स्वास्थ्य और आर्थिक प्रभाव सामने आ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इथेनॉल पहले से ही फैटी लीवर, त्वचा संबंधी बीमारियों, तंत्रिका तंत्र एवं पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याओं का एक बड़ा कारण माना जाता रहा है। ऐसे में इथेनॉल के बढ़ते उपयोग से नई चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं।
इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा
अमरेन्द्र शर्मा ने बताया कि सरकार द्वारा इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा देने का उद्देश्य पेट्रोल पर निर्भरता कम करना और पर्यावरण संरक्षण बताया जा रहा है, लेकिन इसके दूरगामी परिणामों पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
उनका कहना है कि इथेनॉल के दहन में अधिक मात्रा में ऑक्सीजन की खपत होती है तथा कार्बन डाइऑक्साइड के साथ जलवाष्प का भी उत्सर्जन बढ़ता है। इससे वातावरण में नमी बढ़ने और जलवायु परिवर्तन की प्रक्रिया तेज होने की आशंका है।
सूक्ष्मजीवों के पनपने की संभावना
उन्होंने दावा किया कि वातावरण में जलवाष्प की मात्रा बढ़ने से आर्द्रता में वृद्धि होगी, जिससे जीवाणुओं और अन्य रोगजनक सूक्ष्मजीवों के पनपने की संभावना बढ़ेगी और संक्रामक रोगों का विस्तार हो सकता है। इसके अलावा समुद्री क्षेत्रों में जलवाष्प की अधिकता से समुद्री तूफानों की तीव्रता और आवृत्ति बढ़ने की भी आशंका जताई।
आर्थिक प्रभावों पर चर्चा करते हुए श्री शर्मा ने कहा कि इथेनॉल युक्त पेट्रोल के उपयोग से वाहनों के इंजन की आयु कम हो सकती है। इसके अलावा माइलेज में कमी, प्लास्टिक और रबर के पुर्जों पर प्रतिकूल प्रभाव तथा धातुओं में जंग लगने जैसी समस्याएं वाहन मालिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल सकती हैं।
उन्होंने कहा कि इसका सबसे अधिक असर मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ेगा, जिन्हें वाहन रखरखाव पर अधिक खर्च करना पड़ सकता है।
अर्जुन पटेल सम्पादक पुलिस मुखबिर न्यूज
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