किसान गोष्ठी के नाम पर करोड़ों का खेल महराजगंज कृषि विभाग पर फर्जीवाड़े का गंभीर आरोप
फर्जी बिलों के जरिए धन निकालने का आरोप, किसान यूनियन ने उठाई उच्च स्तरीय जांच की मांग;
राष्ट्रीय पदाधिकारियो के साथ स्थानीय किसान नेता की नेतृत्व में प्रमुख सचिव (कृषि) से होगी शिकायत,
महराजगंज। जनपद में कृषि विभाग एक बार फिर गंभीर आरोपों Blame के घेरे में आ गया है। किसान गोष्ठियों और कृषि मेलों के आयोजन के नाम पर फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपये के गबन का मामला सामने आया है।
इस पूरे प्रकरण में विभाग के उच्च अधिकारियों की मिलीभगत होने का आरोप लगाया जा रहा है।
किसान गोष्ठियों और प्रशिक्षण के नाम पर खेल
किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने इस मामले की शिकायत लखनऊ स्थित कृषि विभाग में करते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
सूत्रों के अनुसार, महराजगंज में कृषि विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं जैसे आत्मा योजना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम), ऑयल सीड, प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य योजना आदि के तहत किसान गोष्ठियों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के नाम पर बड़े स्तर पर अनियमितताएं की गई हैं।
भारी-भरकम बिल प्रस्तुत कर भुगतान ले लिया
आरोप है कि इन योजनाओं के तहत आयोजित होने वाली गोष्ठियों का वास्तविक रूप से आयोजन ही नहीं किया गया, जबकि कागजों में उन्हें भव्य रूप से दर्शाते हुए भारी-भरकम बिल प्रस्तुत कर भुगतान ले लिया गया।
वही जिले के वरिष्ठ पत्रकार एवं भारतीय किसान यूनियन के किसान नेता नीरज कुमार मिश्र ने बताया कि वह अगले सप्ताह लखनऊ जाकर प्रमुख सचिव (कृषि) से मिलेंगे और इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच की मांग करेंगे।
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस घोटाले की जांच नहीं कराई गई, तो यह मामला और भी बड़ा रूप ले सकता है।
फर्जी किसान सूची तैयार किया गया
किसानों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों ने फर्जी किसान सूची तैयार कर 12 ब्लॉकों में गोष्ठियों और कृषि मेलों का आयोजन दिखा दिया।
जबकि जमीनी हकीकत यह है कि न तो कहीं टेंट लगाया गया और न ही किसानों को किसी प्रकार का नाश्ता या भोजन उपलब्ध कराया गया। इसके बावजूद कागजों में महंगे ब्रांडेड नाश्ते, भोजन, बसों से पंतनगर व अन्य जगहों पर प्रशिक्षण यात्रा, स्टेशनरी खरीद आदि के नाम पर करोड़ों रुपये का भुगतान दर्शाया गया है।
Blame स्थानीय किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि जिला कृषि अधिकारी (डीडी कृषि) अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ मिलकर सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग कर रहे हैं।
आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य
उन्होंने कहा कि सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के बावजूद यदि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा।
किसानों और किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे। वहीं, इस पूरे प्रकरण को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है और माना जा रहा है कि जल्द ही जांच की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
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