मनरेगा में बड़ा घोटाला उजागर: शिकारपुर में फर्जी हाजिरी से सरकारी धन की लूट, ग्राम विकास अधिकारी निलंबित
Up महराजगंज,सिसवा क्षेत्र की शिकारपुर ग्राम पंचायत में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत चल रहे विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया है।
फर्जी हाजिरी लगाकर मजदूरी भुगतान
Suspend:फर्जी हाजिरी लगाकर मजदूरी भुगतान किए जाने की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है।
इस मामले में ग्राम विकास अधिकारी को Suspend: निलंबित कर दिया गया है, जबकि रोजगार सेवक को सेवा समाप्ति का नोटिस थमाया गया है।
साथ ही ग्राम प्रधान और तकनीकी सहायक से स्पष्टीकरण तलब किया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीते गुरुवार को ग्राम पंचायत एवं क्षेत्र पंचायत से जुड़े तीन अलग-अलग विकास कार्यों के लिए कुल 16 मस्टररोल जारी किए गए थे।
इन मस्टररोल में 123 श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज दिखाई गई थी। लेकिन शुक्रवार को उपायुक्त श्रम, रोजगार एवं मनरेगा गौरवेंद्र सिंह द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में वास्तविक स्थिति पूरी तरह विपरीत पाई गई।
कागज में हो रहा था मनरेगा का खेल
जिन कार्यस्थलों पर मजदूरों की मौजूदगी दर्शाई गई थी, वहां एक भी श्रमिक कार्य करते हुए नहीं मिला।
जांच के दौरान यह भी चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि कई मस्टररोल में 12 से 15 श्रमिकों के नाम एक ही दिन अलग-अलग कार्यों पर दर्ज कर दिए गए थे।
यह न केवल नियमों का खुला उल्लंघन है, बल्कि मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना में सुनियोजित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि फर्जी हाजिरी के आधार पर मजदूरी भुगतान कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।
ग्राम विकास अधिकारी निलंबित Suspend:
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र कुमार सिंह के निर्देश पर ग्राम विकास अधिकारी विनोद कुमार वरुण को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
वहीं रोजगार सेवक बलजीत खरवार की सेवा समाप्ति का नोटिस जारी किया गया है। इसके अलावा ग्राम प्रधान पूनम देवी एवं संबंधित तकनीकी सहायक को कारण बताओ नोटिस देकर जवाब मांगा गया है।
मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में अनियमितता की पुष्टि होने के बाद यह कार्रवाई की गई है।
सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अंतिम जांच में दोष सिद्ध होता है तो और भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।
जवाबदेही पर सवाल
मनरेगा जैसे रोजगारपरक और गरीबों के लिए बनी योजना में इस तरह की गड़बड़ी ने प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती, तो ऐसे फर्जीवाड़े लगातार चलते रहते हैं और जरूरतमंद मजदूरों को उनका हक नहीं मिल पाता।
प्रशासन की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
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