खिचड़ी पर्व पर भी खाली हाथ मनरेगा मजदूर, छह माह से मजदूरी नहीं, महिलाओं का फूटा दर्द
MANREGA महराजगंज। जनपद के सदर विकासखंड अंतर्गत ग्राम सभा भिसवां कोदईला में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना MANREGA की हकीकत बेहद चिंताजनक सामने आई है।
यहां पर मनरेगा के तहत कार्य करने वाली मजदूर महिला रीता गुप्ता सहित लगभग आधा दर्जन महिलाओं ने एक स्वर में आरोप लगाया कि छह माह बीत जाने के बाद भी उनकी मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया।
त्यौहार में मायूसी
महिलाओं ने बताया कि मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पेट पालने की आस अब मायूसी में बदल चुकी है। खिचड़ी का पावन पर्व आ गया है, बेटी के घर खिचड़ी भेजने की परंपरा निभानी है, लेकिन पैसे के अभाव में दिमाग घबरा रहा है।
महिलाओं का कहना है कि त्योहार खुशी लेकर आता है, लेकिन उनके लिए यह चिंता और अपमान का कारण बन गया है।
रीता गुप्ता ने बताया कि मनरेगा MANREGA ही उनके परिवार की आजीविका का मुख्य सहारा है। पुश्तैनी धंधा पहले ही आधुनिक दौर के चलते लगभग बंद हो चुका है।
ऐसे में सरकारी योजना से मिलने वाली मजदूरी ही जीवन की उम्मीद थी, लेकिन वही महीनों से अटकी पड़ी है।
कब तक मिलेगा झूठा आश्वासन
महिलाओं ने सवाल उठाया कि जब सरकार समय से काम लेती है, तो मजदूरी समय पर क्यों नहीं देती? बार-बार पंचायत और ब्लॉक के चक्कर लगाने के बावजूद केवल आश्वासन ही मिला, भुगतान नहीं।
ग्रामीण महिलाओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ तो वे मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता अपनाएंगी।
मनरेगा योजना पर सवाल
इस मामले ने एक बार फिर मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या पर कब तक संज्ञान लेते हैं और गरीब मजदूरों को उनका हक कब तक मिलता है।
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