दुख जीवन के नए द्वार खोलता है, हर चोट में छिपी होती है नई संभावना
रायबरेली। रवि शंकर सिंह ने अपने अंतर्मन की बात साझा करते हुए कहा कि दुख को केवल पीड़ा समझना जीवन के गहरे अर्थ को न समझ पाने जैसा है।
जब जीवन हमारी इच्छाओं के अनुसार नहीं चलता, प्रिय व्यक्ति दूर हो जाता है,
मेहनत के बावजूद सफलता नहीं मिलती या बीमारी-असफलता सामने खड़ी होती है, तब मनुष्य सहज ही सवाल करता है—“ऐसा मेरे साथ ही क्यों हुआ?”
लेकिन हर दुख केवल अंत नहीं होता। कई बार वही पीड़ा मनुष्य की चेतना को सीमित दायरे से बाहर निकलने की शक्ति देती है। जिस तरह मिट्टी के भीतर दबा बीज अंधकार और दबाव सहकर अंकुर बनता है, उसी तरह संघर्षों के बीच इंसान के भीतर छिपी नई संभावनाएं जन्म लेती हैं।
रवि शंकर सिंह के अनुसार कठिन समय हमें यह समझाता है कि धन, रिश्ते और सफलता हमेशा स्थायी नहीं होते। जब परिस्थितियां हमारे मुताबिक नहीं चलतीं, तभी हम स्वयं को अधिक गहराई से जानना शुरू करते हैं।
इसलिए जीवन में आने वाली हर चोट को केवल बुरा अनुभव मानने के बजाय उससे मिलने वाली सीख को पहचानना चाहिए। कई बार दुख ही उस नए रास्ते का दरवाजा खोलता है, जिसकी ओर सामान्य परिस्थितियों में हमारी नजर कभी नहीं जाती।
तेजपाल चौहान की रिपोर्ट पुलिस मुखबिर न्यूज जगतपुर ब्लॉक प्रभारी रायबरेली यूपी
PM News 18 Hindi News Website
