15 साल पुराने तीन हजार वाहन सड़कों पर, सुरक्षा पर बड़ा सवाल
जांच और जागरूकता अभियान के बीच बेरोकटोक दौड़ रहे पुराने वाहन, हादसा हुआ तो बीमा दावे पर भी संकट
महराजगंज। सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार जागरूकता अभियान और वाहन जांच के बावजूद जिले की सड़कों पर पुराने और अनफिट वाहनों का संचालन चुनौती बना हुआ है।
परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में करीब तीन हजार वाहन 15 वर्ष से अधिक पुराने हो चुके हैं। ऐसे वाहनों का सड़क पर दौड़ना राहगीरों और अन्य वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
पुराने वाहनों के संचालन को लेकर परिवहन विभाग ने सख्ती शुरू कर दी है। बीते दिनों एआरटीओ मनोज कुमार सिंह ने खुद मियाद पूरी कर चुके एक वाहन को पकड़कर थाने भिजवाया था।
विभाग की ओर से वाहन स्वामियों को भी पुराने और अनफिट वाहनों का संचालन बंद करने की चेतावनी दी जा रही है।
हादसा हुआ तो बीमा भी बन सकता है परेशानी
नियमों की अनदेखी कर ऐसे वाहन सड़क पर दौड़ते रहे और दुर्घटना हो गई तो वाहन की वैधता, पंजीकरण और फिटनेस को लेकर बीमा दावे के निस्तारण में आपत्ति खड़ी हो सकती है। इससे दुर्घटना के पीड़ितों और वाहन स्वामियों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
जिले में 4.65 लाख से अधिक दोपहिया वाहन
परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में करीब 4.65 लाख दोपहिया वाहन, 12 हजार कारें, पांच हजार टेंपो, 27,200 ट्रैक्टर और 1,020 स्कूल वाहन पंजीकृत हैं। इन वाहनों के बीच करीब तीन हजार वाहन ऐसे हैं, जो 15 वर्ष की अवधि पार कर चुके हैं।
कार्रवाई जारी, फिर भी सवाल कायम
एआरटीओ मनोज कुमार सिंह के अनुसार पुरानी और अनफिट गाड़ियों के संबंध में वाहन स्वामियों को लगातार चेतावनी दी जा रही है।
नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और वैधता समाप्त हो चुके वाहनों का संचालन बंद कराया जा रहा है।
अब बड़ा सवाल यह है कि जांच और जागरूकता अभियान के बावजूद सड़क पर दौड़ रहे हजारों पुराने वाहनों पर पूरी तरह रोक कब लगेगी?
बढ़ते वाहन दबाव के बीच तीन हजार पुराने वाहनों की मौजूदगी सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है। परिवहन विभाग की कार्रवाई कितनी प्रभावी होती है, यह आने वाला समय बताएगा।
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