Tuesday , 14 July 2026

प्रद्युम्न परदेस की नौकरी छोड़ी, सब्जी की खेती से बदली तकदीर

प्रद्युम्न परदेस की नौकरी छोड़ी, सब्जी की खेती से बदली तकदीर

भिंडी और गोभी की खेती से कमा रहे सालाना दो लाख, बने गांव के प्रेरणास्रोत

महराजगंज । अगर मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो कठिन हालात भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। घुघली ब्लाक के भरवलिया गांव के युवा किसान प्रद्युम्न ने इसे सच साबित कर दिखाया है।

खुशहाल और आत्मनिर्भर जीवन

जानकारी के मुताबिक कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाला यह परिवार आज सब्जी की खेती के दम पर खुशहाल और आत्मनिर्भर जीवन जी रहा है।

खबर की माने तो इन दिनों उनके खेतों में लहलहाती भिंडी की फसल गांव के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनी हुई है।

रोज़गार की तलाश में घर छोड़ा

प्रद्युम्न ने बीए तक पढ़ाई करने के बाद वर्ष 2006 में रोज़गार की तलाश में घर छोड़ दिया था, लेकिन बाहर की नौकरी में उनका मन नहीं लगा।

वर्ष 2007 में उन्होंने नौकरी छोड़कर गांव लौटने का फैसला किया। उस समय उनके पिता उमाशंकर पारंपरिक तरीके से धान और गेहूं की खेती करते थे, जिससे परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था।

आर्थिक संकट को देखते हुए प्रद्युम्न ने खेती में बदलाव लाने का निर्णय लिया और सब्जी की खेती शुरू की।
शुरुआत में उन्होंने केवल 20 डिस्मिल जमीन पर प्रयोग के तौर पर सब्जियां उगाईं।

सब्जियों की खेती से दो लाख रुपये का मुनाफा

मेहनत और लगन रंग लाई तो धीरे-धीरे खेती का दायरा बढ़ाते गए। आज वह एक बीघा भूमि पर भिंडी, गोभी समेत अन्य सब्जियों की खेती कर रहे हैं और सालाना करीब दो लाख रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं।

प्रद्युम्न ने बताया कि एक माह पहले लगाई गई भिंडी की फसल से उन्हें अच्छा लाभ मिल रहा है। शुरुआती दौर में भिंडी की कीमत बाजार में 80 से 100 रुपये प्रति किलो तक रही, जिससे आमदनी में काफी बढ़ोतरी हुई।

जानकारी के मुताबिक गर्मियों में वह भिंडी की खेती करते हैं, जबकि सर्दियों में गोभी की फसल तैयार करते हैं।

खेती में परिवार का भी पूरा सहयोग मिलता

उन्होंने बताया कि खेती में परिवार का भी पूरा सहयोग मिलता है। उनकी मां सुशीला, भाई ऋषिकेश और अश्विनी खेतों में साथ मिलकर मेहनत करते हैं। अब उनका आठ सदस्यीय परिवार पूरी तरह आत्मनिर्भर हो चुका है और खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहा है।

गांव के किसान भी अब प्रद्युम्न की सफलता से प्रेरणा लेकर पारंपरिक खेती छोड़ सब्जी उत्पादन की ओर रुख कर रहे हैं। मेहनत, धैर्य और नई सोच से प्रद्युम्न ने यह साबित कर दिया कि खेती भी रोजगार और समृद्धि का मजबूत माध्यम बन सकती है।

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