काली स्थान पर,टूट गई नाली बिखर गया अरमान परसौनी बुजुर्ग की बदहाल तस्वीर
लाखों खर्च, फिर भी बदहाल परसौनी बुजुर्ग! टूटी नालियां, गंदगी का अंबार और काली स्थान तक पहुंचना बना जोखिम
महराजगंज। जिले के घुघली विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत परसौनी बुजुर्ग में विकास के दावों की हकीकत जमीनी स्तर पर कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है।
गांव की टूटी हुई नालियां, जगह-जगह फैली गंदगी और जलभराव ने ग्रामीणों का जीना मुश्किल कर दिया है। सबसे चिंताजनक स्थिति गांव के पश्चिम दिशा स्थित काली स्थान की है, जहां पूजा-अर्चना के लिए आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को जान जोखिम में डालकर गुजरना पड़ता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि नाली निर्माण और साफ-सफाई के नाम पर हर वर्ष लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर उसका कोई असर दिखाई नहीं देता।
बरसात के मौसम में हालात गंभीर
टूटी नालियों के कारण गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे फिसलकर दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है। बरसात के मौसम में हालात और भी बदतर हो जाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की गई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। लोगों का आरोप है कि सरकारी योजनाओं का लाभ कागजों तक ही सीमित है, जबकि गांव की वास्तविक स्थिति स्वच्छ भारत मिशन के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
काली स्थान की कठिन डगर
अब ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव की टूटी नालियों का तत्काल निर्माण कराया जाए, नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए और काली स्थान तक सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था की जाए, ताकि किसी बड़ी दुर्घटना से पहले समस्या का समाधान हो सके।
अब बड़ा सवाल… जब नाली और सफाई पर हर साल लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं, तो आखिर परसौनी बुजुर्ग की बदहाली का जिम्मेदार कौन?
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