देश में ‘अकेलेपन की महामारी’ पर बड़ा सवाल
राष्ट्रपति को भेजा गया ‘अकेलापन मंत्रालय’ बनाने का ऐतिहासिक प्रस्ताव
महराजगंज से उठी आवाज़, अब पहुंचेगी दिल्ली दरबार तक
विनय कुमार पांडेय अधिवक्ता, सह संस्थापक बॉर्डर लॉयर्स ट्रस्ट, महाराजगंज
महराजगंज । उत्तर प्रदेश से एक बड़ी और अनोखी पहल सामने आई है, जिसने पूरे देश में एक नई बहस छेड़ दी है।
महाराजगंज दीवानी न्यायालय अधिवक्ता विनय कुमार पाण्डेय ने देश में तेजी से बढ़ रहे ‘अकेलेपन’ को एक गंभीर राष्ट्रीय संकट बताते हुए महामहिम राष्ट्रपति को एक विस्तृत प्रार्थना पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने ‘अकेलापन मंत्रालय’ (Ministry of Loneliness) के गठन की मांग की है।
अकेलापन’ बना राष्ट्रीय संकट
अपने पत्र में पाण्डेय ने कहा कि आज के डिजिटल युग में जहां लोग तकनीकी रूप से जुड़े हुए हैं, वहीं भावनात्मक रूप से तेजी से अलग-थलग पड़ते जा रहे हैं। उन्होंने इसे “मूक महामारी” बताते हुए चेतावनी दी कि यह देश की सामाजिक और मानसिक संरचना को कमजोर कर रही है।
WHO भी मान चुका है खतरा
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि लंबे समय तक अकेलापन महसूस करना स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक है और यह कई गंभीर बीमारियों जैसे हृदय रोग, अवसाद और अल्जाइमर का कारण बन सकता है।
बुजुर्ग और युवा सबसे ज्यादा प्रभावित
रोजगार के लिए पलायन के कारण गांवों में बुजुर्ग अकेले पड़ रहे हैं, जबकि युवा सोशल मीडिया की दुनिया में खोकर वास्तविक रिश्तों से दूर हो रहे हैं। इससे आत्महत्या और मानसिक तनाव के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है।
‘बॉर्डर लॉयर्स ट्रस्ट’ ने उठाई ठोस मांगें
पाण्डेय ने अपने संगठन ‘बॉर्डर लॉयर्स ट्रस्ट’ के माध्यम से सरकार के सामने कई अहम प्रस्ताव रखे हैं:
‘अकेलापन उन्मूलन मंत्रालय’ की स्थापना
देशभर में अकेलेपन पर राष्ट्रीय सर्वे
गांव-शहर में कम्युनिटी सेंटर और संवाद केंद्र
24×7 हेल्पलाइन सेवा शुरू करने की मांग
विदेशों में बन चुके हैं ऐसे मंत्रालय
ब्रिटेन और जापान जैसे देशों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भारत को भी अब इस दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।
वसुधैव कुटुंबकम का सपना अधूरा न रह जाए”
अपने पत्र के अंत में पाण्डेय ने भावुक अपील करते हुए कहा कि अगर समाज के लोग ही अकेले रह गए, तो ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना अधूरी रह जाएगी।
अब देखने वाली बात होगी कि क्या इस पहल पर केंद्र सरकार संज्ञान लेती है और देश में ‘अकेलेपन’ के खिलाफ कोई बड़ा कदम उठाया जाता है या नहीं।
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