Sanskrit: सीएम योगी ने प्रदेश के संस्कृत विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजना का किया शुभारंभ
Sanskrit पठशालाओं का अब भाग्य चमकेगा, रिक्त पदों पर होगी नयुक्ति, अब तक सरकारों न संस्कृत पाठशालाओं का किया था उपेक्षा
सीएम योगी आदित्यनाथ वाराणसी स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय पहुंचे।
उन्होंने घोषणा की कि संस्कृत विद्यालयों और महाविद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरा जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन स्थानों पर अब तक शिक्षक नहीं हैं, वहां
मानदेय के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति होगी और उनके अनुभव को वरीयता दी जाएगी।
सीएम योगी संस्कृत विद्यालयों और महाविद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरा जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन स्थानों पर अब तक शिक्षक नहीं हैं।
वहां मानदेय के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति होगी और उनके अनुभव को वरीयता दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित समारोह में
प्रदेश के संस्कृत विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजना का शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंच से 12 Sanskrit छात्रों को डेमो चेक देकर प्रदेश के
69,195 संस्कृत विद्यार्थियों को 5 करोड़ 86 लाख की छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम की शुरुआत की।
उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों में संस्कृत शिक्षा को उपेक्षित रखा गया।
गरीब छात्र होने के बाजवूद उनकी मदद नहीं की गई। मुख्यमंत्री ने गुरुकुल पद्धति के आवासीय संस्कृत
विद्यालयों होंगे पुनर्स्थापित
कहा कि गुरुकुल की तरह छात्रों के लिए नि:शुल्क छात्रावास और भोजन की व्यवस्था करने वाले संस्थानों को सरकार मान्यता देकर अनुदान से मदद करेगी।
ऐसे संस्थानों को अच्छे आचार्यों की नियुक्ति की भी स्वतंत्रता दी जाएगी।
Sanskrit को विज्ञान और तकनीकी शिक्षा की भाषा बनाने की जरूरत
मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्कृत न केवल देववाणी है बल्कि यह विज्ञान की भाषा भी है,
जो कंप्यूटर साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों में उपयोगी है।
उन्होंने कहा कि संस्कृत की विशेषताएं इसे तकनीकी दृष्टिकोण से सरल और सहज बनाती हैं।
इसीलिए हम संस्कृत के संरक्षण और संवर्धन के लिए नए प्रयासों की दिशा में कार्य कर रहे हैं।
संस्कृत को विज्ञान और तकनीकी शिक्षा की भाषा के रूप में प्रतिष्ठापित करने की जरूरत है।
सभी विद्यार्थियों का खुले बैंक अकाउंट
मुख्यमंत्री ने छात्रवृत्ति योजना का महत्व बताते हुए कहा कि पहले संस्कृत के केवल 300 विद्यार्थियों को ही छात्रवृत्ति मिलती थी,
उसमें भी आयु सीमा तय थी, लेकिन अब हमारी सरकार ने इसे सभी छात्रों तक पहुंचाने का संकल्प लिया है।
प्रदेश में संस्कृत के 69,195 विद्यार्थियों को इस योजना के तहत लाभान्वित किया जाएगा।
उन्होंने सभी विद्यार्थियों का बैंक खाता खुलवाने का निर्देश भी दिया।
जिससे छात्रवृत्ति का लाभ सीधा और सुरक्षित रूप से मिल सके।
संस्कृत में विशिष्ट शोध को बढ़ावा दे रही सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बीएचयू में स्थापित वैदिक विज्ञान केंद्र के माध्यम से संस्कृत के विशिष्ट शोध को प्रोत्साहित कर रही है।
हमारा प्रयास है कि यह शोध का बड़ा केंद्र बने। इस केंद्र में शोध करने वाले छात्रों के लिए विशेष छात्रवृत्ति भी दी जाएगी
ताकि वे आर्थिक चिंता किए बिना अपने शोध कार्य को बढ़ा सकें।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म और भारत का समय आ गया है।
भारत के समय को नेतृत्व देने के लिए संस्कृत विद्यार्थियों को स्वयं को तैयार करना होगा।
सांस्कृतिक विरासत को संजोने का दायित्व सरकार और समाज का
उन्होंने कहा कि जब भौतिकवाद और चकाचौंध वाली दुनिया में हर व्यक्ति भौतिकता के पीछे भाग रहा है,
तब भी यूपी में डेढ़ लाख बच्चे अपना जीवन संस्कृत और भारतीय संस्कृति को समर्पित करते हुए बढ़ रहे हैं।
यह सरकार और समाज का दायित्व है कि इस विरासत को संजोए रखें।
संस्कृत साहित्य देश की अमूल्य धरोहर
मुख्यमंत्री ने संस्कृत साहित्य को देश की अमूल्य धरोहर बताते हुए महर्षि अरविंद के विचारों का हवाला दिया।
उन्होंने कहा कि संस्कृत साहित्य भारत की महान विरासत है,जो देश की मूल प्रतिभा को जीवंत रखता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि संस्कृत को केवल धार्मिक भाषा नहीं बल्कि विज्ञान,
तकनीक और समाज की तमाम समस्याओं को सुलझाने का सशक्त माध्यम मानकर अध्ययन करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विरासत को विकास के साथ जोड़ने के प्रयासों में काशी को केंद्रबिंदु बनाया गया है।
उन्होंने कहा कि दीपावली से छठ तक उत्सव और पर्व की परंपरा हमारी सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है।
इसे आगे बढ़ाने में हमारी युवा पीढ़ी का योगदान महत्वपूर्ण है। सरकार इस दिशा में हर संभव सहायता करेगी।
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