न बेहन, न बैठौनी… सीधे मशीन से धान की बुवाई
महंगाई और मजदूर संकट का तोड़, सीडर मशीन से खेती जोर पकड़ रही
धान की खेती में क्रांति,सीडर मशीन से सीधे बुवाई, बेहन और बैठौनी के झंझट से मिली मुक्ति
महराजगंज। खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही क्षेत्र में सीडर मशीन से धान की सीधी बुवाई का कार्य तेजी पकड़ चुका है।
बढ़ती मजदूरी, मजदूरों की कमी और खेती की बढ़ती लागत के बीच किसान अब आधुनिक तकनीक की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं।
किसानों की सुनें
किसानों का कहना है कि पारंपरिक तरीके से धान की खेती में पहले बेहन गिराना पड़ता है, फिर खेत की तैयारी कर बैठौनी (रोपाई) करानी पड़ती है, जिसमें काफी समय, मेहनत और खर्च लगता है। लेकिन सीडर मशीन से सीधे खेत में धान की बुवाई होने से इन सभी झंझटों से छुटकारा मिल रहा है।
क्या कहते हैं कृषि विशेषज्ञ
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सीडर मशीन से बुवाई करने पर बीज की बचत होती है, मजदूरों पर निर्भरता कम होती है और समय की भी काफी बचत होती है। यही कारण है कि क्षेत्र के अधिकतर किसान इस नई तकनीक को अपनाने लगे हैं।
किसानों का मानना है कि यदि मौसम अनुकूल रहा तो सीडर मशीन से बोई गई धान की फसल अच्छी पैदावार देगी और उत्पादन लागत भी कम आएगी।
खेती में आधुनिक तकनीक के बढ़ते प्रयोग को देखते हुए इसे किसानों के लिए एक नई उम्मीद और खेती में क्रांतिकारी बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
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