Tuesday , 14 July 2026

Religion: रंगों का पावन पर्व होली और जनसेवा के प्रतीक धीरु भैया का बढ़ता जनविश्वास

Religion: रंगों का पावन पर्व होली और जनसेवा के प्रतीक धीरु भैया का बढ़ता जनविश्वास

महराजगंज। भारत त्योहारों Religion की भूमि है, जहां हर पर्व अपने साथ आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का संदेश लेकर आता है।

उन्हीं पावन पर्वों में से एक है होली—रंगों, उल्लास और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक।

होली की पौराणिक कथा

होली का संबंध भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप की कथा से जुड़ा है। असुर राजा हिरण्यकश्यप स्वयं को भगवान मानता था, लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था।

क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की सहायता से प्रह्लाद को अग्नि में जलाने की योजना बनाई।

अग्नि से न जलने का वरदान

होलिका को अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था, लेकिन ईश्वर की कृपा से भक्त प्रह्लाद सुरक्षित बच गए और होलिका अग्नि में भस्म हो गई।

यही घटना होली के रूप में मनाई जाती है, जो सिखाती है कि सत्य और भक्ति Religion की हमेशा विजय होती है।

अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है, जो आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक समरसता का प्रतीक है।

जनसेवा के रंग में रंगे धीरु भैया

जैसे होली समाज को एक सूत्र में पिरोती है, वैसे ही क्षेत्र में लोकप्रिय समाजसेवी एवं ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि धीरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ़ धीरु भैया ने अपने कार्यों से जनता के दिलों में विशेष स्थान बनाया है।

गरीबों की मदद हो, युवाओं को रोजगार से जोड़ने की पहल हो, या क्षेत्र में विकास कार्यों की रफ्तार—धीरु भैया हर मोर्चे पर सक्रिय नजर आते हैं।

सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक समरसता के मुद्दों पर उनकी सजगता ने उन्हें जन-जन का नेता बना दिया है।

अब क्षेत्र में एक ही चर्चा 

“जनता की पुकार है, अबकी बार विधानसभा में धीरु भैया को भेजना है लोगों का मानना है कि जिस तरह उन्होंने ब्लॉक स्तर पर विकास की नई इबारत लिखी है, उसी तरह विधानसभा में पहुंचकर क्षेत्र की तस्वीर और तकदीर बदल सकते हैं।

होली हमें यह संदेश देती है कि बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः जीत सच्चाई और सेवा की ही होती है।

इसी भावना के साथ यदि जनप्रतिनिधि समाज की सेवा करें, तो विकास के रंग हर घर तक पहुंच सकते हैं।

इस होली पर क्षेत्र की जनता एक नए संकल्प के साथ रंगों में सराबोर है,विकास, विश्वास और जनसेवा के रंग में रंगा हुआ नेतृत्व ही क्षेत्र की असली पहचान बने।

होली के रंगों के साथ जनसेवा का यह उत्सव यूं ही खिलता रहे।

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