मौत के बाद भी जिंदा रहेगा आपका डिजिटल खजाना:जानिए क्या है डिजिटल वसीयत
डिजिटल वसीयत: मौत के बाद भी सुरक्षित रहेगी आपकी ऑनलाइन विरासत
महराजगंज। आज के डिजिटल दौर में लोगों की जिंदगी का बड़ा हिस्सा इंटरनेट और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मौजूद है। ऐसे में अब डिजिटल वसीयत Digital Will की जरूरत तेजी से बढ़ रही है।
उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले के अधिवक्ता विनय कुमार पांडेय ने देश की पहली डिजिटल वसीयत (Digital Will) दाखिल कर एक नया इतिहास रचा है। उन्होंने अपनी पत्नी को “डिजिटल नॉमिनी” (डिजिटल वारिस) घोषित किया है और उन्हें “डिजिटल दामिनी” का नाम दिया है।
इस संबंध में दीवानी न्यायालय के अधिवक्ता विनयकमार पांडेय ने सरकार को एक पत्र देकर भी बताया है । उन्होंने कहा कि आज लोग अपने संपत्ति का वसीयत कर देते हैं, लेकिन इस आधुनिक दौर में डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी वसीयत होना चाहिए
जाने क्या है,डिजिटल वसीयत
डिजिटल वसीयत एक कानूनी दस्तावेज होता है, जिसमें व्यक्ति अपनी मृत्यु के बाद अपने सोशल मीडिया अकाउंट, ईमेल, क्लाउड स्टोरेज, क्रिप्टोकरेंसी और अन्य डिजिटल संपत्तियों के प्रबंधन या हस्तांतरण के बारे में निर्देश देता है।
डिजिटल वसीयत में आमतौर पर फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर, लिंक्डइन जैसे सोशल मीडिया अकाउंट, जीमेल और गूगल ड्राइव जैसे ईमेल और क्लाउड स्टोरेज, ऑनलाइन बैंक खाते, पेपाल, क्रिप्टो वॉलेट और स्टॉक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म जैसी वित्तीय संपत्तियां शामिल होती हैं।
नॉमिनी का अधिकार होगा
इसके अलावा वेबसाइट, ब्लॉग और कंप्यूटर या क्लाउड में सुरक्षित फोटो-वीडियो जैसे डिजिटल कंटेंट भी इसमें शामिल किए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार डिजिटल वसीयत इसलिए जरूरी है, क्योंकि व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके परिजनों को बिना पासवर्ड या अनुमति के ऑनलाइन खातों को बंद करने या महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करने में काफी कठिनाई होती है।
डिजिटल विरासत की सुरक्षा
डिजिटल वसीयत के जरिए व्यक्ति पहले से तय कर सकता है कि उसकी डिजिटल संपत्ति का क्या होगा और कौन उसे संभालेगा।
डिजिटल युग में यह व्यवस्था न सिर्फ सुरक्षा बढ़ाती है, बल्कि व्यक्ति की डिजिटल विरासत को सुरक्षित रखने का भी महत्वपूर्ण माध्यम बनती जा रही है।
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