Saturday , 30 May 2026

अकेलेपन की महामारी पर राष्ट्रपति से गुहार

अकेलेपन की महामारी पर राष्ट्रपति से गुहार

महाराजगंज के अधिवक्ता ने उठाई ‘अकेलापन मंत्रालय’ बनाने की मांग, कहा— समाज भावनात्मक संकट की ओर बढ़ रहा

महराजगंज। उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जनपद महराजगंज से एक गंभीर सामाजिक मुद्दे को लेकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक आवाज पहुंची है।

जिले के अधिवक्ता एवं ‘बॉर्डर लॉयर्स ट्रस्ट’ के सह-संस्थापक विनय कुमार पाण्डेय ने महामहिम राष्ट्रपति को पत्र भेजकर देश में तेजी से बढ़ रही “अकेलेपन की महामारी” (Epidemic of Loneliness) पर चिंता व्यक्त की है।

उन्होंने भारत सरकार से अकेलापन मंत्रालय (Ministry of Loneliness) के गठन की मांग करते हुए इसे राष्ट्रीय स्तर का सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य संकट बताया है।

अपने विस्तृत प्रार्थना पत्र में विनय कुमार पाण्डेय ने कहा कि तकनीकी युग में जहां दुनिया एक क्लिक पर उपलब्ध है, वहीं इंसान भावनात्मक रूप से सबसे ज्यादा अकेला हो गया है।

उन्होंने लिखा कि आज का समाज डिजिटल रूप से जुड़ा जरूर है, लेकिन मानवीय संवेदनाओं और आत्मीय रिश्तों से दूर होता जा रहा है।

उन्होंने अपने पत्र में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का हवाला देते हुए कहा कि अकेलापन अब केवल व्यक्तिगत भावना नहीं, बल्कि एक “सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल” बन चुका है।

लंबे समय तक अकेलेपन की स्थिति व्यक्ति को अवसाद, हृदय रोग, स्ट्रोक, मधुमेह और अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारियों की ओर धकेल रही है।

संयुक्त परिवार टूटे, संवाद खत्म हुआ

पत्र में उल्लेख किया गया कि भारत की पारंपरिक संयुक्त परिवार व्यवस्था तेजी से कमजोर हो रही है।

रोजगार और आधुनिक जीवनशैली के कारण युवा शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं, जबकि गांवों और घरों में बुजुर्ग भावनात्मक उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं। वहीं युवा वर्ग सोशल मीडिया की आभासी दुनिया में इतना खो चुका है कि वास्तविक सामाजिक संबंध कमजोर पड़ते जा रहे हैं।

ब्रिटेन-जापान की तर्ज पर मंत्रालय बनाने की मांग

विनय कुमार पाण्डेय ने कहा कि ब्रिटेन और जापान जैसे देशों ने अकेलेपन की समस्या को गंभीरता से लेते हुए “Ministry of Loneliness” का गठन किया है। भारत को भी समय रहते इस दिशा में ठोस पहल करनी चाहिए।

उन्होंने केंद्र और राज्य स्तर पर “अकेलापन उन्मूलन विभाग” बनाने, राष्ट्रीय सर्वेक्षण कराने, गांवों और शहरों में संवाद केंद्र एवं कम्युनिटी कैफे खोलने तथा 24×7 राष्ट्रीय हेल्पलाइन शुरू करने की मांग की है।

अकेलापन कई विवादों की जड़

‘बॉर्डर लॉयर्स ट्रस्ट’ के माध्यम से सीमावर्ती क्षेत्रों में सामाजिक और कानूनी कार्य कर रहे विनय कुमार पाण्डेय ने कहा कि कई घरेलू विवाद, संपत्ति झगड़े और सामाजिक तनाव की जड़ में संवादहीनता और अकेलापन होता है।

जब व्यक्ति समाज से कटाव महसूस करता है तो उसके भीतर हताशा, अवसाद और अपराध जैसी प्रवृत्तियां जन्म लेने लगती हैं।

राष्ट्रपति से ऐतिहासिक पहल की अपील

अपने पत्र के अंत में उन्होंने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि भारत की “वसुधैव कुटुंबकम” की संस्कृति को बचाने के लिए इस “मूक महामारी” पर तत्काल राष्ट्रीय नीति बनाई जाए।

उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियां भावनात्मक रूप से कमजोर और सामाजिक रूप से असुरक्षित हो जाएंगी।

पत्र पर दिनांक 1 मई 2026 अंकित है तथा इसे विनय कुमार पाण्डेय, अधिवक्ता एवं सह-संस्थापक, बॉर्डर लॉयर्स ट्रस्ट, जिला महराजगंज द्वारा हस्ताक्षरित किया गया है।

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