Tuesday , 1 September 2026

वायरल वीडियो ने खोली एनकाउंटर की पोल, NHRC से निष्पक्ष जांच की मांग- विनय

वायरल वीडियो ने खोली एनकाउंटर की पोल, NHRC से निष्पक्ष जांच की मांग- विनय

सरेंडर के बाद भी चली गोलियां भरत तिवारी मौत मामले में NHRC पहुंची शिकायत,

फर्जी एनकाउंटर के आरोपों से बिहार पुलिस घिरी

अधिवक्ता विनय कुमार पांडेय ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से की उच्चस्तरीय जांच की मांग, SHO निलंबन और वायरल वीडियो को बताया पुलिस कार्रवाई पर बड़ा सवाल

महराजगंज/आरा (बिहार)। बिहार के भोजपुर जनपद के शाहपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी उर्फ भरत तिवारी की मौत का मामला अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) तक पहुंच गया है।

महराजगंज के अधिवक्ता एवं बॉर्डर लॉयर्स ट्रस्ट के सह-संस्थापक विनय कुमार पांडेय ने आयोग को औपचारिक शिकायत भेजकर इसे कथित फर्जी एनकाउंटर और मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला बताया है।

NHRC पहुंची शिकायत

शिकायत के अनुसार 17 से 20 जून 2026 के बीच हुई घटना में सोशल मीडिया पर वायरल फेसबुक लाइव वीडियो में भरत तिवारी को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करते हुए देखा जा सकता है।

आरोप है कि सरेंडर के बावजूद पुलिस ने नजदीक से उसके पैरों में कई गोलियां मारीं, जिसके बाद इलाज के दौरान पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) में उसकी मौत हो गई।

मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब घटना के विरोध में स्थानीय ग्रामीणों और परिजनों ने आरा-बक्सर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-84) पर चक्का जाम कर पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया।

गोली चलाना संविधान का उलंघन 

बढ़ते जनदबाव और विवाद के बीच शाहपुर थाना प्रभारी को निलंबित किए जाने की कार्रवाई भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति आत्मसमर्पण कर चुका था तो उसे गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना पुलिस की जिम्मेदारी थी। ऐसी स्थिति में गोली चलाना संविधान के अनुच्छेद-21 द्वारा प्रदत्त जीवन के अधिकार का उल्लंघन है।

शिकायत में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा PUCL बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले में जारी दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच, दोषी पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने तथा पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की गई है।

फेसबुक लाइव बना सबसे बड़ा सबूत

वायरल वीडियो और SHO के निलंबन के बाद अब लोगों की नजरें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला बिहार में पुलिस जवाबदेही और मानवाधिकार संरक्षण को लेकर बड़ी बहस छेड़ सकता है।

जब आरोपी ने हथियार डाल दिए थे, तो फिर गोलियां क्यों चलीं

अब देखना होगा कि NHRC इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर क्या कदम उठाता है और जांच में सच्चाई किस रूप में सामने आती है।

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