लाखों खर्च, फिर भी बदहाल “पिंक शौचालय”, टूटती सीढ़ियों ने खोली विकास की पोल
मरम्मत के नाम पर निकली रकम, ज़मीनी हकीकत देख दंग रह गई टीम
महराजगंज। सदर विकासखंड के सिसवा राजा गांव में सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं की जमीनी हकीकत सवालों के घेरे में नजर आ रही है।
महिलाओं की सुविधा और स्वच्छता को ध्यान में रखकर बनाए गए “पिंक शौचालय” की हालत आज बद से बदतर हो चुकी है। लगभग एक वर्ष पूर्व निर्मित यह शौचालय आज तक सुचारु रूप से चालू नहीं हो सका और अब यह बदहाली का प्रतीक बन गया है।
ग्रामीणों के मुताबिक शौचालय का निर्माण तो कराया गया, लेकिन उपयोग के लायक व्यवस्था कभी पूरी नहीं हुई। शौचालय के ऊपर पानी की टंकी तो लगाई गई, मगर अंदर की स्थिति बेहद दयनीय है।
हालत ऐसी है कि महिलाएं इसका उपयोग करने से बच रही हैं
प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक भीतर लगा करकट पूरी तरह फटा हुआ है और जगह-जगह गंदगी व अव्यवस्था फैली हुई है। हालत ऐसी है कि महिलाएं इसका उपयोग करने से बच रही हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 7 मई 2026 को पिंक शौचालय की मरम्मत और इंटरलॉकिंग कार्य के नाम पर 1 लाख 606 रुपये की धनराशि निकाली गई, लेकिन मौके पर मरम्मत का कोई स्पष्ट असर दिखाई नहीं देता।
उठ रहा सवाल
ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि आखिर सरकारी धन खर्च होने के बाद भी शौचालय की स्थिति जस की तस क्यों बनी हुई है।
इधर गांव में बनाए गए अमृत सरोवर की हालत भी खराब होती जा रही है। सरोवर की सीढ़ियां टूटकर बिखर चुकी हैं, जिससे वहां आने-जाने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि योजनाओं का केवल कागजों पर विकास दिखाया जा रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति बिल्कुल अलग है।
जब पूरे मामले की सच्चाई जानने के लिए हमारी टीम सिसवा राजा गांव पहुंची, तो वहां का दृश्य देखकर हैरान रह गई।
दिख रही विकास की तस्वीर
सरकारी योजनाओं के नाम पर लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद व्यवस्थाएं दम तोड़ती नजर आईं। गांव में विकास की तस्वीर कहीं दिखाई नहीं दी, बल्कि हर तरफ बदहाली और उपेक्षा की कहानी बयां होती मिली।
ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले को कितना गंभीरता से लेता है और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।
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