Thursday , 16 July 2026

Kaal Bhairav: काल भैरव के विभिन्न स्वरूपों की साधना करने पर  दूर होती हैं परेशानियां

Kaal Bhairav: काल भैरव के विभिन्न स्वरूपों की साधना करने पर  दूर होती हैं परेशानियां

Public times 24
Markandey

Kaal Bhairav: यूपी के महराजगंज में सनातन परंपरा में मार्गशीर्ष मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी को काल भैरवष्टमी को

पूजा अर्चना के बाद हवन का कार्य संपन्न 

डॉ आनंद स्वरूप श्रीवास्तव के देखरेख में नगर के भैरव मंदिर पर धूमधाम से मनाया गया।

जर्नलिस्ट प्रेस क्लब अध्यक्ष अजय कुमार श्रीवास्तव ने भैरवनाथ की पूजा अर्चना किया।

मान्यता के मुताबिक लोगों ने मदिरा भी चढ़ाया इस मौके पर भारी संख्या में लोगों ने पहुंच कर पूजा किए

भाजपा जिला अध्यक्ष संजय पांडेय ने भी दर्जनों साथियों के साथ पूजा अर्चना किया

Kaal Bhairav: जयंती को पर्व के रूप में मनाया गया।भगवान भैरव को शिव जी का उग्र अवतार माना गया है.

मान्यता है कि भगवान भैरव के विभिन्न स्वरूपों की साधना करने पर साधक की परेशानियां दूर होती हैं

Kaal Bhairav: की साधना में मंत्र जप का ज्यादा महत्व है आइए सभी मनोकामनाओं को पूरा करने वाले

भगवान भैरव के मंत्र और उनकी पूजा के दौरान की जाने वाली आरती के बारे में विस्तार से जानते हैं.

क्या है भैरव आराधना

एकमात्र भैरव की आराधना से ही शनि का प्रकोप शांत होता है।

पुराणों के अनुसार भाद्रपद माह को भैरव पूजा के लिए अति उत्तम माना गया है।

भैरवनाथ को मानते हुए व्रत रखते हैं। आराधना से पूर्व जान लें कि कुत्ते को कभी दुत्कारे नहीं

बल्कि उसे भरपेट भोजन कराएँ। जुआ, सट्टा, शराब, ब्याजखोरी, अनैतिक कृत्य आदि आदतों से दूर रहें।

दाँत और आँत साफ रखें। पवित्र होकर ही सात्विक आराधना करें। अपवि‍त्रता वर्जित है।

योग में जिसे समाधि पद कहा गया है

भैरव तंत्र में भैरव पद या भैरवी पद प्राप्त करने के लिए भगवान शिव ने

देवी के समक्ष 112 विधियों का उल्लेख किया है जिनके माध्यम से उक्त अवस्था को प्राप्त हुआ है।

क्या है लोक देवता का मान्यता

लोक जीवन में भगवान भैरव को भैरू महाराज, भैरू बाबा, मामा भैरव, नाना भैरव आदि नामों से जाना जाता है।

कई समाज के ये कुल देवता हैं और इन्हें पूजने का प्रचलन भी भिन्न-भिन्न है, जो कि विधिवत न होकर

स्थानीय परम्परा का हिस्सा है। यह भी उल्लेखनीय है कि भगवान भैरव किसी के शरीर में नहीं आते।

Kaal Bhairav: सड़क के किनारे भैरू महाराज के नाम से ज्यादातर जो ओटले या स्थान बना रखे हैं

दरअसल वे उन मृत आत्माओं के स्थान हैं जिनकी मृत्यु उक्त स्थान पर दुर्घटना या अन्य कारणों से हो गई है।

ऐसे किसी स्थान का भगवान भैरव से कोई संबंध नहीं। उक्त स्थान पर मत्था टेकना मान्य नहीं है।

 

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