आस्था की भीड़ में 10 लाख का खेल
कुशीनगर में आस्था के बीच सुरक्षा पर सवाल
सागर पाठक
क्या बड़े धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा केवल औपचारिकता बनकर रह गई है
क्या भीड़ प्रबंधन और निगरानी के ठोस इंतजाम पहले से नहीं किए जाने चाहिए थे
क्या हर बार घटना के बाद ही प्रशासन की सक्रियता दिखाई देगी
कुशीनगर। Religion जनपद के नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र स्थित प्राचीन चऊरा बाबा मंदिर परिसर में आयोजित नव दिवसीय श्री हनुमंत महायज्ञ की भव्य कलश यात्रा आस्था और श्रद्धा का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रही थी। लगभग 25 हजार श्रद्धालुओं की मौजूदगी में निकली
शोभायात्रा में भक्ति का उत्साह
लेकिन इसी भीड़ और आस्था की आड़ में चोरों ने कानून-व्यवस्था को खुली चुनौती दे डाली। जानकारी के अनुसार, यात्रा के दौरान छह महिलाओं के सोने के आभूषण चोरी हो गए।
पीड़ितों के मुताबिक करीब 10 लाख रुपये से अधिक मूल्य के जेवरात पार कर दिए गए और किसी को भनक तक नहीं लगी।
घटना के बाद भीड़ में एक संदिग्ध महिला को पकड़कर पुलिस को सौंपा गया है, जिससे पूछताछ जारी है। हालांकि, सवाल यह है कि जब इतने बड़े आयोजन की पूर्व सूचना प्रशासन को थी, तो सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त और प्रभावी क्यों नहीं रही?
सीसीटीवी निगरानी पर सवाल
धार्मिक आयोजनों में भारी भीड़ उमड़ना स्वाभाविक है, लेकिन ऐसी घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर कमियों की ओर संकेत करती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े आयोजनों में पर्याप्त पुलिस बल, महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती, सादे कपड़ों में सुरक्षा कर्मी, सीसीटीवी निगरानी और लगातार सार्वजनिक घोषणाएं जरूरी होती हैं।
प्रशासन से अपेक्षा थी
श्रद्धालुओं की आस्था और सुरक्षा दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए प्रशासन को पहले से ठोस, व्यापक और दिखाई देने वाले सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने होंगे, ताकि अपराधियों के हौसले पस्त हों और आमजन का विश्वास बना रहे।
आस्था का उत्सव तभी सार्थक है जब श्रद्धालु स्वयं को सुरक्षित महसूस करें। आस्था रूपी ज्ञान के गंगा में डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालु तों पहुंचते हैं ,लेकिन श्रद्धा में कमी हो जाती है।
शायद यही कारण है कि इस तरह घटनाएं धर्म के समय हो जाता है। मामला चाहे जो भी हो लेकिन यह घटना निंदनीय नहीं है।
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