अब ‘अपराधी’ नहीं, ‘राष्ट्रीय नायक’ कहलाएं क्रांतिकारी,राष्ट्रपति से ऐतिहासिक न्याय की मांग
महराजगंज, उत्तर प्रदेश। देश की आज़ादी के 78 साल बाद भी ब्रिटिशकालीन अभिलेखों में भारतीय क्रांतिकारियों को ‘अपराधी’ और ‘राजद्रोही’ कहे जाने के मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है।
अधिवक्ता विनय कुमार पाण्डेय, सह-संस्थापक ‘बॉर्डर लॉयर्स ट्रस्ट’, ने इस ऐतिहासिक अन्याय को समाप्त करने के लिए महामहिम राष्ट्रपति को एक विस्तृत प्रार्थना पत्र भेजा है।
कैसा था ब्रिटिश हुकमत
पत्र में उन्होंने कहा कि शहीद-ए-आजम भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, रामप्रसाद बिस्मिल और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के नाम आज भी पुराने सरकारी रिकॉर्ड में ‘आतंकवादी’, ‘राजद्रोही’ या ‘फरार अपराधी’ के रूप में दर्ज हैं, जो देश के सम्मान पर एक काला धब्बा है।
उन्होंने तर्क दिया कि ब्रिटिश शासन स्वयं अवैध था, इसलिए उस दौरान चलाए गए मुकदमे और दी गई सजाएं भी स्वतः शून्य मानी जानी चाहिए।
उन्होंने लिखा है कि अंग्रेजों द्वारा क्रांतिकारियों की जब्त की गई संपत्तियों को उनके वंशजों को लौटाने या मुआवजा देने की भी मांग की गई है।
राष्ट्रीय न्यायिक शुद्धिकरण आयोग’ का गठन
क्रांतिकारियों के रिकॉर्ड से ‘अपराधी’ शब्द हटाकर ‘राष्ट्रीय नायक’ दर्ज करना,कुर्क संपत्तियों की वापसी या मुआवजा,संसद में विशेष कानून लाने की मांग
दस्तावेजों में हमारे नायकों को
अधिवक्ता विनय कुमार पांडेय ने अपने पत्र में कहा कि यदि आज भी दस्तावेजों में हमारे नायकों को अपराधी बताया जाएगा, तो यह आने वाली पीढ़ियों के साथ सबसे बड़ा अन्याय होगा।
महराजगंज की धरती से उठी यह आवाज अब राष्ट्रीय स्तर पर गूंज रही है। सवाल साफ है
क्या आज़ादी के अमृत काल में देश अपने असली नायकों को न्याय दिला पाएगा
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