Saturday , 30 May 2026

Diwali : एक ऐसा गांव जहां योगी के नाम दीप जलाते है गांव के लोग 

  • Diwali : एक ऐसा गांव जहां योगी के नाम दीप जलाते है गांव के लोग 

Diwali : यूपी के गोरखपुर कुसम्ही जंगल में बसे वनटांगिया गांव जंगल तिकोनिया नंबर तीन के लोग

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगमन की प्रतीक्षा में उल्लसित और उमंगित हैं।

कारण, सीएम योगी इस वनटांगिया गांव में Diwali : मनाने आते हैं।

यहां दीप योगी के नाम पर प्रज्वलित होते हैं

वनटांगिया गांव जंगल तिकोनिया नंबर तीन में प्रशासन अपनी तैयारियों में जुटा है

तो गांव के लोग मुख्यमंत्री की अगवानी के लिए अपने-अपने घर-द्वार को साफ सुथरा बनाने,

रंग रोगन करने और सजाने-संवारने में। तैयारी ऐसी मानों उनके घर उनका आराध्य आने वाला हो।

मिलजुलकर। मुख्यमंत्री इस गांव में गुरुवार (31 अक्टूबर) को आकर दीपोत्सव मनाएंगे।

वनटांगिया समुदाय के साथ दीपावली की खुशियां साझा करने के साथ

इस गांव में 185 करोड़ का मिलेगा सौगात

मुख्यमंत्री जिले की कई ग्राम पंचायतों को कुल 185 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात देंगे।

वनटांगिया गांव के Diwali : में सीएम योगी उत्तर प्रदेश जल निगम द्वारा 42 गांवों में उपलब्ध कराई गई

पेयजल परियोजनाओं का लोकार्पण करेंगे। इस पर 150 करोड़ 35 लाख रुपये की लागत आई है।

इसके अलावा वह 32 ग्राम पंचायतों में परफॉर्मेंस ग्रांट से 34 करोड़ 66 लाख की लागत से कराए गए

विकास कार्यों का भी लोकार्पण करेंगे। दीपावली के इस समारोह में कार्यक्रम स्थल पर

कई विभागों कीतरफ से स्टाल लगाकर शासन की जनहित वाली योजनाओं की जानकारी भी दी जाएगी।

उधर, मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर प्रशासन और ग्रामीण जोरदार तैयारियों में जुटे हुए हैं।

सीएम योगी की अगवानी के लिए वनटांगिया समुदाय के लोगों का उत्साह स्वाभाविक है।

सीएम योगी की ही वजह से वनटांगिया गांव जंगल तिकोनिया नंबर तीन को अति विशिष्ट गांव के रूप में जाना जाता है।

सीएम योगी ने खुद द्वारा शुरू की गई परंपरा

योगी यहां वर्ष 2009 से ही बतौर सांसद यहां दीपावली मनाते रहे हैं और 2017 में

पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने खुद द्वारा शुरू की गई परंपरा में रुकावट नहीं आने दी है।

बतौर मुख्यमंत्री वह गुरुवार को लगातार आठवीं बार वनटांगियों के साथ दीपावली की खुशियां साझा करेंगे।

योगी के कदम पड़ने के साथ ही वनटांगियों की उपेक्षा लगातार पूरी होती उम्मीदों में बदलती गई।

उन्होंने वनटांगिया अधिकारों के लिए लड़कर 2010 में अपने स्थान पर बने रहने का अधिकार पत्र दिलाया।

वनटांगिया गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा देकर उन्हें शासन प्रदत्त सभी सुविधाओं का हकदार बना दिया।

वनटांगिया गांवों को आवास, सड़क, बिजली, पानी, स्कूल, जैसे संसाधनों के साथ ही यहां रहने वालों को

जनहित की सभी योजनाओं से आच्छादित कर दिया है। ऐसे में गांव के लोगों ने खुशी मनाया

रविवार को वनटांगिया गांव में मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं

तो गांव के लोग भी उमंग-तरंग के साथ स्वागत को तैयार हैं। अब देखना है की बाबा समय से पहुंचते हैं

सौ साल तक उपेक्षित रहे वनटांगिया

ब्रिटिश हुकूमत में जब रेल पटरियां बिछाई जा रही थीं  स्लीपर के लिए जंगलों से साखू के पेड़ों की कटान हुई।

साखू के नए पौधों के रोपण कर उनकी देखरेख के लिए गरीब भूमिहीनों, मजदूरों को जंगल मे बसाया।

साखू के जंगल बसाने के लिए वर्मा देश की “टांगिया विधि” का इस्तेमाल किया गया,

इसलिए वन में रहकर यह कार्य करने वाले वनटांगिया कहलाए।

कुसम्ही जंगल के पांच इलाकों जंगल तिनकोनिया नम्बर तीन,रजही खाले टोला, रजही नर्सरी,

आमबाग नर्सरी व चिलबिलवा में इनकी पांच बस्तियां वर्ष 1918 में बसीं।

इसी के आसपास महराजगंज के जंगलों में अलग अलग स्थानों पर इनके 18 गांव बसे। 1947 में देश

भले आजाद हुआ लेकिन वनटांगियों का जीवन गुलामी काल जैसा ही बना रहा।

जंगल बसाने वाले इस समुदाय के पास देश की नागरिकता तक नहीं थी।

नागरिक के रूप में मिलने वाली सुविधाएं तो दूर की कौड़ी थीं।

जंगल में झोपड़ी के अलावा किसी निर्माण की इजाजत नहीं थी।

पेड़ के पत्तों को तोड़कर बेचने और मजदूरी के अलावा जीवनयापन का कोई अन्य साधन भी नहीं।

समय समय पर वन विभाग की तरफ से वनों से बेदखली की कार्रवाई का भय अलग से।

वनटांगियों के लिए तारणहार बने योगी

वर्ष 1998 में योगी आदित्यनाथ पहली बार गोरखपुर के सांसद चुने गए।

नक्सलियों पर लगा

वनटांगिया बस्तियों में नक्सली अपनी गतिविधियों को रफ्तार देने की कोशिश में हैं।

नक्सलियों पर लगाम के लिए उन्होंने सबसे पहले शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बस्तियों तक पहुंचायी

इस काम में लगाया गया उनके नेतृत्व वाली महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं

एमपी कृषक इंटर कालेज व एमपीपीजी कालेज जंगल धूसड़ और गोरखनाथ मंदिर की तरफ से

संचालित गुरु श्री गोरक्षनाथ अस्पताल की मोबाइल मेडिकल सेवा को।

जंगल तिनकोनिया ३ वनटांगिया गांव में 2003 से शुरू ये प्रयास 2007 तक आते आते मूर्त रूप लेने लगे।

इस गांव के कोटेदार रामगणेश कहते है कि महाराज जी (योगी आदित्यनाथ को वनटांगिया समुदाय के लोग

इसी संबोधन से बुलाते हैं) यहां तारणहार बनकर आए। और गांव का समुचित विकास करा दिया

बकौल रामगणेश, 2009 में जंगल तिकोनिया नम्बर तीन में योगी के सहयोगी वनटांगिया बच्चों के लिए

एस्बेस्टस शीट डाल एक अस्थायी स्कूल का निर्माण कर रहे थे।

वन विभाग ने इस कार्य को अवैध बताकर एफआईआर दर्ज कर दी।

योगी ने अपने तर्कों से विभाग को निरुत्तर किया और अस्थायी स्कूल बन सका।

हिन्दू विद्यापीठ नाम से यब विद्यालय आज भी योगी के संघर्षों का साक्षी है।

योगी के कदम पड़े तो हुआ जंगल से इतर जीवन के रंगों का अहसास

वनटांगियों को सामान्य नागरिक जैसा हक दिलाने की लड़ाई शुरू करने वाले योगी ने वर्ष 2009 से

वनटांगिया समुदाय के साथ दीपोत्सव मनाने की परंपरा शुरू की

पहली बार इस समुदाय को जंगल से इतर भी जीवन के रंगों का अहसास हुआ।

यह सिलसिला बन पड़ा। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी योगी इस परंपरा का निर्वाह करना नहीं भूलते हैं।

इस दौरान बच्चों को मिठाई, कापी-किताब और आतिशबाजी का उपहार देकर पढ़ने को प्रेरित करते हैं

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