सरकार के विकास पर भ्रष्टाचार का गड्ढा, नहर पटरी की सड़क बनी मुसीबत
NH-730 बाईपास की बदहाल सड़क पर जनता बेहाल, प्रशासन गहरी नींद में
गौनरिया नहर पटरी बनी मौत का रास्ता, सड़क एक साल में ही उखड़ी, जनता बोली – आखिर किसे बचा रहा प्रशासन
महराजगंज । जनपद मुख्यालय से करीब 5 किलोमीटर दूर NH-730 से बाईपास होकर निकलने वाली नारायणी माइनर नहर की पटरी शिकारपुर सिंदुरिया मार्ग से पूरब लगभग तीन किलोमीटर इन दिनों बदहाली और भ्रष्टाचार की जीती-जागती तस्वीर बन चुकी है।
गिट्टी डालकर छोड़ दी सड़क, हजारों ग्रामीण रोज झेल रहे दर्द
जानकारी के मुताबिक कुछ दिन पहले लगभग 2 किलोमीटर सड़क बनाई गई। बाकी आगे पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो गई है और जगह-जगह बिखरी गिट्टियां राहगीरों के लिए खतरा बनी हुई हैं।
सबसे बड़ी बात यह है कि इस मार्ग से दर्जनों गांवों के हजारों लोग रोजाना जिला मुख्यालय पहुंचकर अपने विभागीय और जरूरी कार्यों का निस्तारण करते हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठा है।
आवागमन पूरी तरह प्रभावित है
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण में भारी अनियमितता बरती गई। सड़क बने अभी एक वर्ष भी पूरा नहीं हुआ और उसकी परत उखड़ने लगी।
महीनों पहले गिट्टी डालकर कार्य अधूरा छोड़ दिया गया, जिससे आवागमन पूरी तरह प्रभावित है। राहगीरों, स्कूली बच्चों और मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के मुताबिक हैरानी की बात यह है कि अब तक मौके पर कोई सूचना बोर्ड तक नहीं लगाया गया है, जिससे यह पता चल सके कि कार्य किस संस्था द्वारा कराया जा रहा है और इसकी जिम्मेदारी किसकी है।
जनता सवाल उठा रही है कि क्या ठेकेदार और विभागीय अधिकारी मिलकर उत्तर प्रदेश सरकार की छवि धूमिल करने में जुटे हैं?
सरकार को बदनाम करने की साजिश तो नहीं
एक ओर सरकार गांवों को बेहतर संपर्क मार्ग से जोड़ने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर विभागीय लापरवाही और भ्रष्टाचार सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहे हैं।
क्षेत्रवासियों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस बदहाल सड़क की सुध लेता है या फिर जनता की आवाज को यूं ही नजरअंदाज कर दिया जाएगा।
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