मांधाता के पवित्र हनुमान मंदिर की बेशकीमती जमीन पर आखिर किसकी नजर
करोड़ों की संपत्ति पर कथित भू-माफियाओं की निगाह! मंदिर ट्रस्ट और श्रद्धालुओं को आखिर कब मिलेगी अतिक्रमण के साये से मुक्ति
मांधाता, प्रतापगढ़। मांधाता थाना के ठीक सामने स्थित प्रसिद्ध हनुमान मंदिर क्षेत्र ही नहीं, बल्कि आसपास के हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर परिसर में वर्षभर विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। यही वजह है कि इस मंदिर से लोगों की गहरी धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है।
लेकिन अब सवाल उठ रहा है कि मंदिर की बेशकीमती जमीन पर आखिर किसकी नजर है? मांधाता-प्रतापगढ़ मुख्य मार्ग पर स्थित होने के कारण मंदिर की भूमि का वर्तमान बाजार मूल्य करोड़ों रुपये में बताया जाता है।
ऐसे में आरोप लग रहे हैं कि मंदिर की जमीन को लेकर कथित भू-माफियाओं की नजर गड़ गई है और जमीन पर कब्जे की कोशिशों को लेकर मंदिर ट्रस्ट एवं श्रद्धालुओं में चिंता बढ़ती जा रही है।
आस्था की जमीन या भू-माफियाओं का निशाना?
जिस भूमि पर वर्षों से धार्मिक गतिविधियां संचालित होती आ रही हैं, जहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं, उसी जमीन को लेकर यदि किसी प्रकार की कब्जे की कोशिश सामने आती है तो यह महज जमीन का विवाद नहीं, बल्कि हजारों-लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा गंभीर विषय बन जाता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि मंदिर की जमीन को लेकर उठ रहे इन सवालों की निष्पक्ष जांच कब होगी? क्या जिम्मेदार अधिकारी मंदिर की भूमि के अभिलेखों और मौके की स्थिति की जांच करेंगे? क्या मंदिर ट्रस्ट और श्रद्धालुओं को कथित कब्जे की कोशिशों से स्थायी सुरक्षा मिल पाएगी?
प्रशासन से उठी जांच और कार्रवाई की मांग
मंदिर ट्रस्ट एवं श्रद्धालुओं के बीच अब यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि मंदिर की जमीन की सीमांकन कराकर अभिलेखों की जांच कराई जाए और यदि किसी व्यक्ति द्वारा अवैध कब्जे अथवा कब्जे के प्रयास की पुष्टि होती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
मांधाता के बीचोंबीच, थाना के ठीक सामने स्थित इस ऐतिहासिक एवं आस्था के केंद्र को लेकर उठ रहे सवालों ने कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
आखिर मंदिर की करोड़ों की जमीन पर किसकी नजर है?कौन है पर्दे के पीछे?
और मंदिर ट्रस्ट व श्रद्धालुओं को कथित भू-माफियाओं के दबाव से आखिर कब मिलेगी आजादी?
अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।
अभिषेक सिंह पुलिस मुखबिर न्यूज ब्यूरो प्रभारी प्रतापगढ़ की रिपोर्ट।
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