Thursday , 15 October 2026

मौत के बाद भी जिंदा रही दोस्ती, श्मशान में बिखर गया दर्द का सैलाब

दोस्ती की आखिरी पुकार: चिता से पहले पहुंची सखी, मंजर देख कांप उठा दिल

एक बार बोल लेते-सखी का विलाप सुन हर कोई रो पड़ा

मौत के बाद भी जिंदा रही दोस्ती, श्मशान में बिखर गया दर्द का सैलाब

दोस्ती दूरी और समय की मोहताज नहीं होती

अंतिम विदाई में सखी का दर्द: बलिया से दौड़ी चली आई, श्मशान घाट पर फूट-फूट कर रोई 

डॉ अर्जुन पटेल

मित्रता का एक ऐसा भावुक दृश्य सामने आया जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भीतर तक झकझोर दिया।

एक महिला के निधन की खबर जैसे ही उसकी सखी को मिली, वह बिना देर किए बलिया से सीधे अंतिम दर्शन के लिए निकल पड़ी। जब तक वह पहुंची, तब तक शव को श्मशान घाट लाया जा चुका था और अंतिम संस्कार की तैयारियां चल रही थीं।

श्मशान घाट पर जैसे ही वह सखी पहुंची और नीचे उतरते ही अपनी प्रिय मित्र का शव देखा, वह खुद को संभाल नहीं सकी।

शमशान पर छलका सखी का दर्द

मामला उत्तर प्रदेश के जनपद महराजगंज स्थित वरवां खुर्द गांव का है। जहां गांव के सम्मानित नागरिक आनंद पटेल जी के माता जी का देहांत हो गया ।जिनका अंतिम संस्कार घुघली के बैकुंठ घाट पर तैयारी चल रही थी। इस दौरान एक दर्द भरी कहानी सामने आ गई

अंतिम संस्कार मे पहुंचे लोगों के अनुसार वर्षों पूर्व बलिया की एक महिला जो गांव पर ही स्वास्थ्यकर्मी रही। उनसे पहले दोस्ती हई फिर वह सखी के रिश्ते मैं बदल गई  और वह एक अटूट बंधन हो गया ।

 दोस्त की अंतिम यात्रा last journey

मिली खबर के मुताबिक जब उनको यह खबर मिली कि मेरे दोस्त का निधन हो गया। उन्होंने प्रतिज्ञा किया कि हम उनके अंतिम यात्रा मे भागीदार होकर अपने को धन्य होकर चाहती हूं। वह बलिया से गांव होते हए शमशान घाट पहुंच गई और क्या हआ

जोर-जोर से विलाप करने लगी। उसकी चीख-पुकार और दर्द भरी पुकार सुनकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं और माहौल पूरी तरह करुणा से भर गया।

सोचो साथ क्या जाएगा last journey

कुछ ही क्षणों बाद शव को मुखाग्नि देने की तैयारी थी, लेकिन इस दृश्य ने हर किसी को एक पल के लिए सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर इस जीवन से साथ क्या जाता है।

रिश्ते, भावनाएं और अपनापन ही वो चीजें हैं जो इंसान के जाने के बाद भी जिंदा रहती हैं।

इस मार्मिक घटना ने यह साबित कर दिया कि सच्ची दोस्ती दूरी और समय की मोहताज नहीं होती। एक सखी का इतना दूर से आकर अंतिम विदाई देना, इस बात का प्रतीक है कि इंसानी रिश्तों की गहराई कितनी अमूल्य होती है।

अंतिम संस्कार यात्रा में गांव के क्षेत्र पंचायत सदस्य रामनिवास वर्मा,  राम भवन, नरसिंह शर्मा, राजेंद्र पटेल ,अमरजीत शर्मा ,राममिलन वर्मा, संत , बल्ली, प्रहलाद पटेल, शाहिद सैकड़ो की संख्या में गांव के लोग और क्षेत्र की जनता के साथ पुरी पटीदारी के लोग मौजूद रहे।

Share:

About Markandey Diwedi

दोस्तों नमस्कार आप सभी शुद्ध पाठकों को अवगत कराना है कि राष्ट्रीय हिंदी मासिक पत्रिका public mukhbir जो बहराइच से प्रकाशित होकर पूर्वांचल के बस्ती, गोरखपुर ,कुशीनगर, सिद्धार्थ नगर ,देवरिया, महराजगंज, गोंडा ,बहराइच se Bihar rajya में प्रसारण हो रहा है मुझे यह विश्वास है कि हमारे द्वारा प्रकाशित किया गया समाचार आपको पसंद आएगा धन्यवाद

Check Also

निचलौल और कटहरी बाजार में दुकानों पर छापेमारी

नवरात्र में मिलावटखोरों पर खाद्य सुरक्षा विभाग का शिकंजा!   निचलौल और कटहरी बाजार में …