Religion: गुलाल की गूंज, रिश्तों का साज, होली लाए दिलों में नया अंदाज़
नंदलाल गुप्ता
होली का पावन पर्व
महराजगंज। भारत त्योहारों की धरती है और इन्हीं उत्सवों में एक ऐसा पर्व आता है, जो रंगों, उमंगों और प्रेम का संदेश लेकर आता है ।
यह केवल रंगों का त्योहार Religion नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई की विजय, भाईचारे और सामाजिक एकता का प्रतीक है।
होली से जुड़ा पौराणिक कथा
होली का इतिहास पौराणिक कथाओं से जुड़ा हुआ है। प्रह्लाद और होलिका की कथा हमें यह सिखाती है कि सत्य और Religion की हमेशा जीत होती है।
अहंकारी हिरण्यकश्यप की शक्ति भी भगवान की कृपा के सामने टिक न सकी।
होलिका दहन इस बात का प्रतीक है कि बुराई चाहे कितनी भी प्रबल क्यों न हो, अंत में उसका नाश निश्चित है।
पुरानी कटुता भूलकर नई शुरुआत करें
होली का उत्सव फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन लोग एक-दूसरे को गुलाल और रंग लगाकर गले मिलते हैं, पुरानी कटुता भूलकर नई शुरुआत करते हैं।
ढोल-नगाड़ों की थाप, फाग गीतों की गूंज और घरों में बनती गुझिया, मालपुआ और ठंडाई इस पर्व की मिठास को और बढ़ा देते हैं।
होली सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है। इस दिन अमीर-गरीब, ऊँच-नीच का भेद मिट जाता है। सभी लोग एक साथ रंगों में सराबोर होकर खुशियां मनाते हैं।
प्राकृतिक रंगों का प्रयोग करना चाहिए
गांवों में चौपाल से लेकर शहरों की गलियों तक, हर जगह उत्साह और उल्लास का अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है।
आज के समय में हमें होली को पर्यावरण के प्रति जागरूक होकर मनाना चाहिए। रासायनिक रंगों के स्थान पर प्राकृतिक रंगों का प्रयोग करना चाहिए और पानी की बर्बादी से बचना चाहिए।
साथ ही, होली के उत्साह में किसी की भावनाओं को ठेस न पहुंचे, इसका भी ध्यान रखना आवश्यक है।
नफरत के रंग मिटाएं
जानकारी के मुताबिक होली केवल रंग खेलने का पर्व नहीं, बल्कि दिलों को रंगने का अवसर है। यह हमें प्रेम, भाईचारे और एकता का संदेश देती है।
Religion आइए, इस होली पर हम यह संकल्प लें
नफरत के रंग मिटाएं,प्रेम और सद्भाव के रंग फैलाएं।
अगर ऐसा हो जाता है तो समाज को एक नई दिशा मिलेगी और आपसी भेदभाव समाप्त होगा।
PM News 18 Hindi News Website
