Sunday , 30 August 2026

पुलिस संवाद में शिष्ट भाषा अनिवार्य करने की मांग, राष्ट्रपति को भेजा पत्र

पुलिस संवाद में शिष्ट भाषा अनिवार्य करने की मांग, राष्ट्रपति को भेजा पत्र

 

महराजगंज। पुलिस और जनता के बीच संवाद को अधिक सम्मानजनक एवं मानवीय बनाने की मांग को लेकर अधिवक्ता एवं बॉर्डर लॉयर्स ट्रस्ट के सह-संस्थापक विनय कुमार पांडेय ने राष्ट्रपति को पत्र भेजा है।

विनय कुमार पांडेय ने पत्र के माध्यम से उन्होंने पुलिसकर्मियों द्वारा आमजन से बातचीत के दौरान सम्मानजनक, संयमित और गरिमापूर्ण भाषा के अनिवार्य प्रयोग के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है।

पत्र में कहा गया है कि पुलिसकर्मी राज्य के प्रतिनिधि के रूप में सीधे जनता के संपर्क में रहते हैं। ऐसे में उनका व्यवहार और संवाद की भाषा शासन की छवि के साथ-साथ नागरिकों के आत्मसम्मान को भी प्रभावित करती है।

कई अवसरों पर पुलिसकर्मियों द्वारा आमजन से बातचीत में “तू, तेरा, आ, जा, अबे, तबे” जैसे असम्मानजनक एवं आदेशात्मक शब्दों के प्रयोग की शिकायतें सामने आती हैं। इससे पुलिस और जनता के बीच अविश्वास तथा तनाव की स्थिति पैदा होती है।

सम्मानजनक संवाद के निर्देश हों

विनय कुमार पांडेय ने मांग की है कि पुलिसकर्मियों को सामान्य संवाद में “तू/तेरा” के स्थान पर “आप/आपका” तथा “आ/जा” के स्थान पर “आइए/जाइए” जैसे सम्मानजनक शब्दों के प्रयोग के स्पष्ट निर्देश दिए जाएं। साथ ही व्यक्ति की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली भाषा पर रोक लगाने की मांग की गई है।

उन्होंने अपने प्रस्ताव में पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों में “Police-Public Communication, Courtesy, Human Rights एवं Soft Skills” को अनिवार्य प्रशिक्षण का हिस्सा बनाने

प्रत्येक थाने में जनता से सम्मानजनक संवाद संबंधी आचार-संहिता प्रदर्शित करने तथा पुलिस अधिकारियों द्वारा अधीनस्थ कर्मचारियों के व्यवहार एवं भाषा की समय-समय पर समीक्षा करने की मांग की है।

व्यक्ति की गरिमा का रखा जाए ध्यान

पत्र में यह भी कहा गया है कि शिकायतकर्ता, पीड़ित, गवाह, अभियुक्त, वृद्ध, महिला, दिव्यांग तथा आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के साथ मानवीय और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने “सम्मानजनक भाषा–सम्मानजनक पुलिसिंग” नाम से अभियान चलाने का भी सुझाव दिया है।

अधिवक्ता पांडेय ने राष्ट्रपति से इस संबंध में संबंधित सरकारों को आवश्यक संवैधानिक एवं प्रशासनिक परामर्श देने तथा राज्यपालों एवं मुख्यमंत्रियों के माध्यम से पुलिस विभागों को जनता के साथ सम्मान, शिष्टाचार, संयम और मानवीय गरिमा के साथ संवाद सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित करने का अनुरोध किया है।

उन्होंने कहा कि “पुलिस का अधिकार कानून से आता है, लेकिन पुलिस की प्रतिष्ठा उसके व्यवहार से बनती है। सम्मानजनक भाषा कोई एहसान नहीं, बल्कि नागरिक गरिमा का सम्मान है।”

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