Shardiya Navratri जाने कब होगा नवरात्रि के नवमी पूजा का शुभमुहूर्त
इस साल शारदीय नवरात्रि 9 दिन की जरूर है लेकिन तिथि में वृद्धि व लोप है। ऐसे में अष्टमी व नवमी तिथि एक दिन पड़ रही है। शास्त्रों के अनुसार, सप्तमी युक्त अष्टमी तिथि का व्रत नहीं करना चाहिए। जिस तिथि में सूर्योदय नहीं हो, उस तिथि का लोप माना जाता है।
पंडित प्रेम सागर पांडेय के अनुसार, 11 अक्टूबर को सुबह 6.52 बजे तक अष्टमी तिथि है। इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो रही है। इस वर्ष पंचांग में नवमी तिथि का लोप हो रहा है। आइए पंडित जी से जानते हैं अष्टमी का व्रत किस दिन रखें,
रात की पूजा कब होगी
काशी पंचांग के जानकार पंडित प्रेम सागर पांडेय के अनुसार, गुरुवार को सप्तमी युक्त अष्टमी पड़ रही है। इस दिन अष्टमी तिथि सुबह 7.29 बजे से शुरू हो रही है। अष्टमी तिथि शुक्रवार 11 अक्टूबर की सुबह 6.52 बजे तक रहेगी।
पंडित जी के अनुसार, अष्टमी की रात में होने वाला निशा पूजा सप्तमी युक्त अष्टमी तिथि यानि 10 अक्टूबर की मध्य रात्रि में की जाएगी, जबकि अष्टमी व्रत उपवास करने का मुहूर्त उदयातिथि के कारण 11 अक्टूबर (अष्टमी युक्त नवमी तिथि) को पड़ रहा है।
कब होगा व्रत पारण
पंडित जी के अनुसार, अष्टमी का उपवास करने वाले श्रद्धालु 12 अक्टूबर, विजयादशमी को अपना व्रत तोड़ेंगे। नवमी तिथि का समापन 12 अक्टूबर सूर्योदय के पहले 5.47 बजे हो रहा है। दशमी तिथि में सूर्योदय होने के कारण 12 अक्टूबर शुद्ध रूप से दशमी होगा।
अष्टमी पूजा मुहूर्त (दृक पंचांग अनुसार),ब्रह्म मुहूर्त- 04:40 ए एम से 05:29 ए एम,प्रातः सन्ध्या- 05:04 ए एम से 06:19 ए एम ,अभिजित मुहूर्त- 11:43 ए एम से 12:30 पी एम,विजय मुहूर्त- 02:03 पी एम से 02:49 पी एम, गोधूलि मुहूर्त- 05:55 पी एम से 06:19 पी एम, सायाह्न सन्ध्या- 05:55 पी एम से 07:09 पी एम, अमृत काल- 11:05 पी एम से 12:40 ए एम, 12 अक्टूबर, सुबह से लेकर शाम तक पूजा के मुहूर्त,चर – 06:20 से 07:47,अमृत – 09:14 से 10:41 वार वेला,लाभ – 21:02 से 22:35 काल रात्रि
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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