देशभक्ति के तरानों से गूंज उठा परसा राजा
साहित्यकारों ने बांधा ऐसा समां कि देर रात तक जमी रही महफिल
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर उत्तर प्रदेश साहित्य सभा की भव्य काव्य गोष्ठी, शायरों-कवियों की रचनाओं पर झूमे ग्रामीण
महराजगंज। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर उत्तर प्रदेश साहित्य सभा, महराजगंज इकाई के तत्वावधान में परसा राजा गांव में आयोजित भव्य काव्य गोष्ठी देशभक्ति, कविता और गीतों के रंग में सराबोर रही।
सभा के सह सचिव दिव्यांश कुमार पाण्डेय के पैतृक आवास पर आयोजित इस साहित्यिक संध्या में जनपद के नामचीन शायरों, कवियों, लेखकों और गीतकारों ने अपनी रचनाओं से ऐसा समां बांधा कि उपस्थित ग्रामीण देर रात तक मंत्रमुग्ध होकर साहित्यिक प्रस्तुतियों का आनंद लेते रहे।
कार्यक्रम का नेतृत्व सभा के अध्यक्ष परशुराम गुप्त एवं संयोजक कुमार देवेश पाण्डेय ने किया। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित होने के कारण गोष्ठी में देशभक्ति की भावना विशेष रूप से दिखाई दी। कवियों और गीतकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से देशप्रेम, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक सरोकारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
एक मंच पर जुटे साहित्य के सितारे
काव्य गोष्ठी में शायर नवीन शुक्ला, तशरीफ खान और दिव्यांश कुमार पाण्डेय ने अपनी शायरी से श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं। लेखक एवं कवि राघवेश पति त्रिपाठी, अविनाश श्रीवास्तव ‘डोपामिन’, डॉ. शशि कुमार वर्मा, धीरज वर्मा और आशीष शुक्ला ने अपनी रचनाओं के जरिए साहित्य के विविध रंग प्रस्तुत किए।
गीतकार एवं गायक शैलेंद्र तिवारी, अभिषेक पटेल और मशहूर गायक मनोज मद्धेशिया ने गीत-संगीत से माहौल को और भी जीवंत बना दिया। वहीं हास्य कवि आशुतोष कुमार मिश्रा ने अपनी हास्य रचनाओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। राजेश स्वर्णकार, दयाशंकर निगम और अशफाक खान ने भी अपनी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में रंग भर दिया।
देर रात तक तालियों से गूंजता रहा परसा राजा
कार्यक्रम का सफल संचालन पंकज वर्मा ने किया। साहित्यिक संध्या में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों, साहित्य प्रेमियों और प्रबुद्धजनों ने सहभागिता की। एक के बाद एक प्रस्तुत हुई रचनाओं और देशभक्ति के गीतों पर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाईं और साहित्यकारों का उत्साहवर्धन किया।
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित इस काव्य गोष्ठी ने गांव के वातावरण को साहित्य और राष्ट्रप्रेम से भर दिया। देर रात तक चली इस महफिल में कविता, शायरी, गीत और हास्य का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने उपस्थित लोगों के बीच साहित्य के प्रति नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया।
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